उत्तर प्रदेशकानपुर

SIT ने दर्ज किए चश्मदीदों के बयान, पत्नी मीनाक्षी ने कहा- केस रफादफा करने के लिए बनाया गया दबाव

कानपुर के प्रॉपर्टी डीलर मनीष गुप्ता की हत्या के मामले में चश्मदीद हरवीर सिंह ने अहम खुलासे किए हैं. एक मीडिया नेटवर्क ने बात करते हुए उन्होंने बताया कि होटल में कमरा खुलवाने के बाद मारपीट की शुरुआत पहले दरोगा अक्षय और जेएन सिंह ने की थी.

उन्होंने बताया कि अक्ष्य में पहले उन्हें थप्पड़ मारा फिर जेएन सिंह ने मनीष को थप्पड़ मारा था. हरवीर सिंह कानपुर में एसआईटी टीम को बयान देने पहुंचे थे. उन्होंने बताया कि मारपीट पहले दरोगा अक्ष्य मिश्रा और थानेदार जेएन सिंह ने शुरू की थी. हरवीर सिंह ने बताया कि होटल में चेकिंग की बात कहकर पहले अक्षय ने मुझे थप्पड़ मारा. फिर जेएन सिंह ने मनीष को थप्पड़ मारा. इसके बाद पुलिसकर्मी कमरे घुस आए और मारपीट करन लगे. हरवीर ने बताया कि मनीष का कमरा उन्होंने खुलवाया था. उन्होंने कहा कि अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

पूरे घटनाक्रम को लेकर दर्ज किए बयान

पूछताछ के दौरान एसआईटी ने हरवीर से पुलिस के होटल में आने, रूम का दरवाजा खटखटाने और सिपाही द्वारा कमरे के बाहर जबरन ले जाने के पूरे घटनाक्रम का बयान दर्ज किया. हरवीर के साथ प्रदीप सिंह से भी एसआईटी ने पूछताछ की. प्रदीप सिंह से भी पुलिस ने किस तरह का बर्ताव कैसा था. इसके बाद बेड पर सो रहे मनीष से किस बात को लेकर बहस हुई, इसकी भी जानकारी ली गई.

गोरखपुर जाने की क्या थी वजह?

एसआईटी की टीम ने हरवीर और प्रदीप से गोरखपुर जाने की वजह भी पूछी. मनीष गुप्ता को गोरखपुर बुलाने पर भी सवाल किए गए. एसआईटी ने हरविंदर, प्रदीप से पूछताछ के बाद अब चंदन सैनी के दोबारा बयान दर्ज कर सकती है. चंदन के बुलावे पर ही मनीष, हरवीर और प्रदीप गोरखपुर गए थे.

‘मेरे पति को मार दिया’

इसी के साथ एसआईटी ने मनीष की पत्नी के भी बयान दर्ज किए. मनीष की पत्नी मीनाक्षी ने अपने बयान में कहा कि पुलिसवालों ने मेरे पति को मार दिया. केस दबाने के लिए अफसरों ने मुझपर दबाव बनाया और होटल प्रशासन ने हत्या के साक्ष्य मिटा दिए. वारदात को साजिश रचकर अंजाम दिया गया है.

एसआईटी के सदस्य डीसीपी साउथ रवीना त्यागी बुधवार को मीनाक्षी के घर पहुंची थी. सबसे पहले मीनाक्षी के बयान दर्ज किए गए, इसके बाद पांच घंटे तक मीनाक्षी से बातचीत की गई. मीनाक्षी ने बताया कि 26 सितंबर की शाम मनीष को दोनों दोस्त हरवीर सिंह और प्रदीप कानपुर आए. यहां से मनीष उनके साथ गोरखपुर गए थे.

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