उत्तर प्रदेशलखनऊ

क्रान्तिकारी गंगू मेहतर के जीवन पर कैनवास पर की कलात्मक अभिव्यक्ति: डॉ. वन्दना सहगल

  • 1857 के महान क्रान्तिकारी गंगू मेहतर के व्यक्तित्व को देश के 68 कलाकारों ने अपनी दृष्टि से कैनवास पर उकेरा
  • राष्ट्रीय ललित कला अकादेमी, क्षेत्रीय केन्द्र, लखनऊ मे छः दिवसीय राष्ट्रीय कला शिविर का हुआ समापन

लखनऊ। 1857 के क्रान्तिकारी गंगू मेहतर की स्मृति में राष्ट्रीय ललित कला अकादेमी, क्षेत्रीय केन्द्र, लखनऊ में राष्ट्रीय चित्रकला शिविर का समापन हो गया । कला शिविर में देश के 68 कलाकारों ने भाग लिया। शिविर में 25 अन्य राज्यों एवं 43 स्थानीय कलाकारों ने भाग लिया। शिविर की समारोह की मुख्य अतिथि ए.के.टी., विश्वविद्यालय की प्राचार्य एवं डीन, आक्रिटेक्चर एवं प्लानिंग संकाय, डॉ. वन्दना सहगल ने कहा कि शिविर में कलाकारों की प्रस्तुतियां काफी सराहनीय है। कलाकारों के सुन्दर, सरल और सहज कलात्मक अभिव्यक्ति को देखकर 1857 के महान क्रान्तिकारी गंगू मेहतर की कई अनसुनी घटनायें दृष्टिगत हो रही है। कलाकारों ने गंगू मेहतर के स्वतन्त्रता में दिये गये अमूल्य योगदान को चित्रित किया। यह सभी चित्र से आने वाले पीढ़ियों को स्वतन्त्रता के हीरो को जानने और समझने में काफी मदद मिलेगी।

कार्यक्रम में आये विशिष्ट सेवा मेडल प्राप्त ब्रिगेडियर प्रवीण कुमार जायसवाल, डी.आई.जी. आई.टी.बी.पी. ,ने कहा कि हमारे देश के स्वतन्त्रता में अनेक रूपों में अपने योगदान देने वाले ऐसे महान हीरों को कला के माध्यम से याद करना एक सच्ची श्रद्धांजलि ही है । आजादी के अमृत महोत्सव की कड़ी में हो रहे ललित कला अकादेमी के क्रार्यक्रमों की सराहना की जानी चाहिए। शिविर के संयोजक डॉ. संजीव किशोर गौतम ने छः दिवसीय शिविर के अनुभवों को साझा किया एवं कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर और भी कार्यक्रम अकादेमी द्वारा आयोजित किया जाएंगे।

छः दिवसीय कला शिविर में लगभग 50 कलाकृतियों के साथ लगभग 300 फीट के कैनवास पर समस्त कलाकारों ने अपने कूंची और रंगों से देश के 1857 स्वतन्त्रता संग्राम के हीरों गंगू मेहतर के तमाम घटनाओं को चित्रित किया। इस कला शिविर में कलाकार तेजिंदर कांडा, चंडीगढ़ , दिवाकर शर्मा, दिल्ली, रोहित शर्मा, दिल्ली, जगजीत सिंह, पंजाब, सुदीप हाजरा सहित 68 कलाकारों ने भाग लिया।

इस अवसर पर बिठूर से आए गंगू बाबा के परपोते तुलसी राम का मुख्य अतिथि ने सम्मान किया। इस अवसर पर ज्योति रंजन पाणिग्रही एवं संयोजिका डॉ. सारिका बाला , भूपेन्द्र अस्थाना कला समीक्षक एवं डॉ. विभावरी सिंह की उपस्थिति रही। इस कार्यक्रम का संचालन एवं सभी अतिथियों व कलाकारों को धन्यवाद क्षेत्रीय सचिव, डॉ. देवेन्द्र त्रिपाठी ने किया। उन्होंने बताया कि इस शिविर की परिकल्पना केन्द्रीय संस्कृति मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की है, जिसको साकार रूप देने की योजना अकादेमी के अध्यक्ष डॉ. उत्तम पाचारणे की है।

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