इटावाउत्तर प्रदेश

शिवपाल बोले- हमें अखिलेश यादव के जवाब का इंतजार, 11 अक्टूबर के बाद जनता को सुना देंगे अपना फैसला

प्रसपा प्रमुख शिवपाल सिंह यादव सपा से गठबंधन के लिए 11 अक्टूबर तक अखिलेश यादव के जवाब का इंतजार करेंगे। तब तक अखिलेश का कोई जवाब नहीं आता तो 12 अक्टूबर को मथुरा से अकेले चुनाव का शंखनाद करेंगे। इटावा जिला सहकारी बैंक मुख्य शाखा भवन में संवाददाताओं से शिवपाल यादव ने कहा कि उन्होंने सपा से गठबंधन के लिए पूरा प्रयास कर लिया है और अभी भी अखिलेश के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा अब निर्णय सपा प्रमुख को करना है, इसके बाद वह समाजवादी चिंतक राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथि 12 अक्टूबर को मथुरा में बांके बिहारी के दर्शन के साथ ही सामाजिक परिवर्तन रथ लेकर चुनावी शंखनाद के लिए निकल पड़ेंगे। शिवपाल यादव ने कहा कि वह चाहते हैं कि समझौता हो तो अच्छा रहेगा नहीं तो प्रसपा विधानसभा की सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि सपा से गठबंधन नहीं होता तो आगे की रणनीति तय करेंगे और समान विचारधारा वाली पार्टियों से गठबंधन करेंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आ चुका है ऐसे में समान विचारधारा वाली पार्टियों के बड़े नेताओं से लगातार संपर्क किया जा रहा है। असदुद्दीन ओवैसी को लेकर उन्होंने कहा कि वह बड़े व सेकुलर नेता हैं, लेकिन गठबंधन के बारे में अभी कुछ कहना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि उनसे बातचीत निश्चित तौर पर राजनीतिक थी, लेकिन अभी कुछ तय नहीं है।

गन्ना समर्थन मूल्य बढ़ाना चुनावी हथकंडा : अखिलेश

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा राज में किसान और बुनकर तबाह हैं। पहले किसानों के मान को गिराना फिर नाम भर के लिए दाम बढ़ा देना, भाजपा का ये चुनावी हथकंडा अब यूपी में चलने वाला नहीं है। झूठ और नफरत के सहारे भटकाने-बहकाने वाली भाजपा की चालाकी से जनता को सजग कराने के लिए सपाई घर-घर जाएंगे। भाजपा का अन्याय अब बर्दाश्त नहीं होगा। अखिलेश ने जारी बयान में कहा कि किसानों के पैदा किए गए कपास और बुनकरों द्वारा बनाए गए कपड़े से भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। भाजपा के कारण दोनों वर्ग संकट में हैं। सरकार की नीतियों ने व्यापार को चौपट कर दिया है। महंगाई और भ्रष्टाचार से समाज का हर वर्ग परेशान है। नौजवान का भविष्य अंधकारमय है।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने अपने संकल्प-पत्र के वादों को भुलाकर जनता के साथ छल किया है। किसान को एमएसपी नहीं मिली। किसान तीन काले कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर 10 महीने से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। भाजपा सरकार उनकी सुन नहीं रही है। भाजपा जाते-जाते गन्ना किसानों के बकाए का ब्याज न सही मूल ही चुका दे तो बड़ी बात होगी। ब्याज अदायगी की बात तो अब भाजपा नेता भूलकर भी नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि देश के अन्नदाता का सम्मान न करने वाली दम्भी भाजपा सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार खो चुकी है। किसान आंदोलन भाजपा के अंदर टूटन का कारण बनने लगा है। छह माह बाद समाजवादी सरकार बनते ही राज्य की पीड़ित जनता के साथ कोई अन्याय नहीं कर सकेगा? सन् 2022 में समाजवादी सरकार किसानों का सच्चा मान बढ़ाएगी।

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