उत्तर प्रदेशलखनऊ

अफसरों के आए अच्छे दिन : 28 पीसीएस बनेंगे आईएएस, दिल्ली में होगी फाइनल प्रमोशन बैठक

लखनऊ. उत्तर प्रदेश पीसीएस एसोसिएशन के सचिव पवन गंगवार सहित इस वर्ष 1998, 1999 और 2000 बैच के 30 में से 28 पीसीएस अफसर प्रोन्नत होकर आईएएस अधिकारी बन जाएंगे. पवन कुमार गंगवार लखनऊ विकास प्राधिकरण के सचिव हैं. पीसीएस अधिकारियों को आईएएस प्रोन्नत करने के लिए डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी की मीटिंग बुधवार को दिल्ली में होंगी. इसमें 28 नाम फाइनल होना तय माना जा रहा है.

उत्तर प्रदेश कैडर के 1996-97 बैच के 30 पीसीएस अफसरों की बाधित डीपीसी के काफी जद्दोजहद के बाद फाइनल होने के बाद प्रमोशन का सिलसिला शुरू हुआ. इस अड़चन के साफ़ होने के बाद 2 को छोड़ कर 1998 का पूरा बैच प्रोन्नत हो आईएएस बन चुका है. अब जल्द ही इन तीन बैचों के प्रमोशन जल्द हो जाएगा.

प्रोन्नत होने वाले अधिकारियों की सूची

फिलहाल नियुक्ति विभाग ने आईएएस के लिए संघ लोक सेवा आयोग को प्रोन्नत होने वाले अधिकारियों की सूची भेज दी है. उत्तर प्रदेश के पीसीएस अधिकारियों के आईएएस में प्रोन्नत का रास्ता लगभग साफ है. वर्ष 2021 में प्रोन्नत पाने वालों में 1998 बैच के 4, 1999 का पूरा बैच जिसमें 17 अफसर प्रोन्नत होंगे. 2000 बैच के 7 अधिकारीयों का नाम इस सूची में शामिल किया गया है.

1999 बैच के प्रमोट होने वाले अफसरों में मनोज कुमार राय (टापर), पवन कुमार गंगवार, निधि श्रीवास्तव, खेमपाल सिंह, संजय चौहान, सुनील कुमार चौधरी, संतोष कुमार शर्मा, अरुण कुमार, श्री प्रकाश गुप्ता, श्याम बहादुर सिंह, उदय सिंह, बृजेश कुमार, हरिकेश चौरसिया, महेंद्र सिंह, रविन्द्र पाल सिंह, अनिल कुमार और प्रभुनाथ हैं. 2000 बैच में वंदना त्रिपाठी (टापर), धनंजय शुक्ला, समीर वर्मा, अर्चना गहरवार, कुमार विनीत, विशाल सिंह और कपिल सिंह प्रोन्नत हो बनेंगे आईएएस. वहीं, भीष्म लाल (1994) और घनश्याम सिंह (1997) का लिफाफा बंद है.

काफी जद्देजहद के बाद रास्ता साफ़ हो पाया

बताते चलें कि वर्ष 2000 में यूपी से उत्तराखंड के अलग होने के बाद प्रदेश के कुछ अफसरों को उत्तराखंड कैडर आवंटित हुआ था. उनमें कई अफसर उत्तराखंड चले गए. कई वर्षों तक उत्तर प्रदेश में ही विभिन्न तरह की कानूनी अड़चनें लगाकर प्रदेश में विराजमान रहे. इसके चलते कुछ समय तक पीसीएस से प्रोन्नत होने वाले अफसरों का प्रमोशन बाधित रहा. काफी जद्देजहद के बाद रास्ता साफ़ हो पाया.

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