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असंतुष्टों के सुरों पर भाजपा की पैनी नजर

भोपाल: मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में बनी सरकार में शामिल किए गए मंत्रियों और विभाग वितरण की कशमकश के बीच भाजपा के भीतर असंतोष के स्वर सुनाई देने लगे हैं। पार्टी ने इन असंतुष्टों पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है और इनसे संवाद भी किया जा रहा है।

राज्य में पूर्ण बहुमत न होने के बावजूद कांग्रेस में हुई बगावत के कारण भाजपा के हाथ में सत्ता तो आ गई है लेकिन भाजपा के सत्ता में आने के बाद पहले तो मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर खींचतान चली और अब विभाग वितरण को लेकर माथा मारी हो रही है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थकों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिलाने के लिए खासे सक्रिय हैं।

पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है यह बात कई नेताओं के बयानों से जाहिर हो रही है। ताजा बयान पूर्व मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता जय भान सिंह पवैया का आया है। वे महारानी लक्ष्मीबाई को लेकर सिंधिया राजघराने पर अप्रत्यक्ष रुप से निशाना साधते रहे हैं। अब उन्होंने एक बार फि र लक्ष्मीबाई को लेकर कहा है, “मध्यप्रदेश के नए मंत्री गण जब ग्वालियर आये तो वीरांगना लक्ष्मी बाई की समाधी पर दो फूल चढ़ाने क्यों नहीं गए? याद रखें यह प्रजातंत्र और मंत्री परिषद शहीदों के लहू से ही उपजी है।”

पवैया के इस बयान के राजनीति नि:हितार्थ खोजे जा रहे हैं। पवैया के बयान के बाद कांग्रेस नेता के.के. मिश्रा ने तंज कसते हुए कहा, “धन्यवाद जयभानसिंह पवैया, आपका यह कथन सर्वथा उचित कि प्रदेश के मंत्री ग्वालियर आकर वीरांगना लक्ष्मीबाई की प्रतिमा पर नमन करने क्यों नहीं जाते? शायद, जिसके तलवे चाटना है, उनका कोप? कथित राष्टवादी बनने के बाद इनका डीएनए कराना चाहिए, सीएम भी नहीं गए!”

राजनीतिक विश्लेषक अरविंद मिश्रा का कहना है कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए लोगों को ज्यादा महत्व दिए जाने से भाजपा के पुराने नेताओं में असंतोष होना स्वभाविक है, इसको लेकर भाजपा का सजग व सतर्क होना जरुरी है। लिहाजा असंतोष को दबाना पार्टी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

इससे पहले पूर्व मंत्री और जबलपुर के पाटन विधानसभा क्षेत्र से विधायक अजय विश्नोई ने संगठन को चेताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “पहले मंत्रियों की संख्या और अब विभागों का बंटवारा। मुझे डर है कहीं भाजपा का आम कार्यकर्ता हमारे नेता की इतनी बेइज्जती से नाराज न हो जाए। नुकसान हो जाएगा।”

पूर्व विधायक पारुल साहू ने दल-बदल पर तंज कसते हुए कहा, “ये राजनीतिक दहेज प्रताड़ना कहीं तलाक का कारण ना बन जाये, मेरा शीर्ष नेतृत्व से निवेदन है कि जननायक मुख्यमंत्री शिवराज के प्रति आम जन में लगाव और सम्मान को इस तरह धूमिल नहीं किया जाए। उनके अनुभव, पार्टी के प्रति निष्ठा और कार्यकर्ताओं की भावना के अनुरूप कोई भी निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री को पूर्ण स्वतंत्रता दी जाये।”

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि कांग्रेस के लोग भाजपा में आए हैं, उन्हें महत्व देना है, इससे कुछ लोगों में असंतोष हो सकता है मगर पार्टी उन्हें समझा रही है। इसके साथ ही उनकी गतिविधियो पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। पार्टी सत्ता में है, असंतोष को पनपने नहीं दिया जाएगा। इतना ही नहीं जो पार्टी लाइन के खिलाफ जाएंगे, उन पर सख्त कार्रवाई करने से भी पार्टी पीछे नहीं हटेगी।

पार्टी ने पूर्व में असंतोष जताने वाले नेताओं को कार्यालय में बुलाकर हिदायत दे दी है, जिनमें पूर्व मंत्री दीपक जोशी, सागर से विधायक शैलेंद्र जैन शामिल हैं। कुछ ट्वीट सामने आने के बाद से पार्टी की नजर ऐसे असंतुष्टों पर और पैनी हो गई है।

ज्ञात हो कि राज्य में कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में आए पूर्व केद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कारण भाजपा की सरकार बनी है। यही कारण है कि सिंधिया के साथ भाजपा में आए 14 लोगों को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। इससे भाजपा के कई दिग्गजों को बाहर रहना पड़ा है।

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