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कांग्रेस को एक साल बाद मिलेगा नया अध्यक्ष, सितंबर 2022 में होगा पार्टी के प्रेसिडेंट के लिए चुनाव: सूत्र

कांग्रेस के अध्यक्ष पद का चुनाव सितंबर 2022 में किया जाएगा. सूत्रों ने इसकी जानकारी दी है. ये जानकारी ऐसे समय पर सामने आई है, जब शनिवार को नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय पर कांग्रेस कार्य समिति की बैठक हुई. वहीं, देश की सबसे पुरानी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल खड़ा किया. दरअसल, पार्टी अध्यक्ष को लेकर ये मांग इसलिए भी बढ़ गई थी, क्योंकि पंजाब में पार्टी के भीतर सियासी घमासान देखने को मिला था. इसके बाद वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने पार्टी नेतृत्व को लेकर सवाल खड़ा करते हुए CWC की बैठक बुलाने की मांग की थी. हालांकि, आज हो रही CWC की बैठक से सिब्बल नदारद हैं.

वहीं, CWC की बैठक के दौरान सोनिया गांधी ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि पार्टी की कमान पूरी तरह से उनके हाथों में है. सोनिया गांधी ने CWC की बैठक में अपनी शुरुआती टिप्पणी में कहा कि मैं फुल टाइम कांग्रेस अध्यक्ष हूं. ये सिब्बल के उस सवाल का जवाब था, जिसमें उन्होंने कांग्रेस के अध्यक्ष को लेकर पूछा था कि पार्टी का अध्यक्ष कौन है? CWC की बैठक में सोनिया गांधी ने कहा कि मुझे आप पूर्णकालिक अध्यक्ष ही मानिए. उन्होंने कहा कि वह अध्यक्ष पद के लिए जल्द चुनाव कराना चाहती थी, मगर कोरोनावायरस की वजह से इसमें देरी हुई. पिछले दिनोें कांग्रेस में पार्टी अध्यक्ष को लेकर विवाद इतना बढ़ गया था कि वरिष्ठ नेताओं गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल ने सोनिया गांधी को पत्र लिखा था, जिसमें उनसे पार्टी से जुड़े मामलों पर चर्चा के लिए CWC की बैठक बुलाने की मांग की गई थीं.

कांग्रेस नेताओं के पार्टी छोड़ने पर सिब्बल ने किया था कटाक्ष

कपिल सिब्बल ने पार्टी की पंजाब इकाई में मचे घमासान और कांग्रेस की मौजूदा स्थिति को लेकर कहा था कि CWC की बैठक बुलाई जानी चाहिए और संगठनात्मक चुनाव होने चाहिए. सिब्बल ने नेताओं के पार्टी छोड़ने का उल्लेख करते हुए गांधी परिवार पर इशारों-इशारों में कटाक्ष किया कि जो लोग इनके खासमखास थे वो छोड़कर चले गए, लेकिन जिन्हें वे खासमखास नहीं मानते वे आज भी इनके साथ खड़े हैं. दरअसल, सुष्मिता देव, जितिन प्रसाद, लुईजिन्हो फालेरियो और कई अन्य वरिष्ठ नेता पिछले कुछ महीनों में कांग्रेस छोड़कर दूसरे दलों में शामिल हो गए हैं.

किसान आंदोलन और जम्मू-कश्मीर में हुई हत्याओं को लेकर सोनिया ने कही ये बात

दूसरी ओर, सोनिया ने बैठक के दौरान बीजेपी नीत केंद्र सरकार किसान आंदोलन और जम्मू-कश्मीर में हो रही हत्याओं को लेकर हमला बोला. सोनिया ने कहा, लखीमपुरी खीरी की घटना बीजेपी की किसान आंदोलन को लेकर बीजेपी की असल मानसिकता को दिखाती है. ये दिखाती है कि बीजेपी किसान आंदोलन को किस नजरिए से देखती है. इसने दिखाया है कि बीजेपी किसानों द्वारा अपने जीवन और आजीविका की रक्षा के लिए इस दृढ़ संघर्ष से कैसे निपट रही है. जम्मू-कश्मीर में हुई हत्याओं की निंदा करते हुए सोनिया ने कहा कि दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने और प्रदेश में शांति और सौहार्द बहाल करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है.

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