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27 सितंबर को भारत बंद: किसानों के समर्थन में कूदीं कई पार्टियां, जानें देशव्यापी हड़ताल के दौरान क्या-क्या चीजें रहेंगी बंद

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ 27 सितंबर को किसानों द्वारा बुलाए गए ‘भारत बंद’ को देशभर के राजनीतिक दलों का समर्थन मिला है. संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि कानूनों के खिलाफ इस देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है. इस हड़ताल को कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा), बहुजन समाज पार्टी, वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश सरकार और वामपंथी दलों समेत कई राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया है. संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने बंद को लेकर कहा कि भारत बंद शांतिपूर्ण होगा और किसान यह सुनिश्चित करेंगे कि जनता को कम से कम असुविधा का सामना करना पड़े. संयुक्त किसान मोर्चा के मुताबिक ये देशव्यापी बंद सुबह 6 बजे से शुरू होगा और शाम 4 बजे तक जारी रहेगा.

क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद?

इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार के कार्यालयों, बाजारों, दुकानों, कारखानों, स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. बयान में कहा गया है कि सार्वजनिक और निजी परिवहन की अनुमति नहीं दी जाएगी. किसी भी सार्वजनिक समारोह की अनुमति नहीं दी जाएगी. बंद के दौरान एंबुलेंस और दमकल सेवाओं सहित केवल आपातकालीन सेवाओं को ही काम करने की अनुमति होगी.

एसकेएम ने कहा, ‘बंद शांतिपूर्ण और स्वैच्छिक होगा और आपातकालीन सेवाओं को इससे छूट मिलेगी.’ 40 से अधिक किसान संघों के संगठन एसकेएम ने कहा कि किसानों ने 9 महीने से अधिक समय से अपना विरोध जारी रखा है क्योंकि सरकार विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त नहीं करने पर अडिग रही है.

आप ने भारत बंद का किया समर्थन

आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्डा ने कहा कि उनकी पार्टी 27 सितंबर को संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आहूत भारत बंद के आह्वान का पुरजोर समर्थन करती है. उन्होंने कहा कि आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हमेशा ‘काले कानूनों’ के खिलाफ किसानों के साथ खड़े रहे हैं. चड्डा ने ट्वीट किया, ‘आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल हमेशा इन काले कानूनों के खिलाफ किसानों के साथ खड़े रहे हैं. आम आदमी पार्टी, संयुक्त किसान मोर्चा के 27 सितंबर के भारत बंद के आह्वान का पुरजोर समर्थन करती है.’

कांग्रेस ने आंदोलनरत किसान संगठनों के बंद का समर्थन किया

कांग्रेस ने केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसान संगठनों द्वारा बुलाए गए ‘भारत बंद’ को समर्थन देने की घोषणा की. साथ ही प्रदर्शन कर रहे किसानों से वार्ता बहाल करने की मांग उठाई. कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके सभी कार्यकर्ता किसान संगठनों व किसानों द्वारा 27 सितंबर को बुलाए गए शांतिपूर्ण भारत बंद का समर्थन करेंगे. उन्होंने कहा, ‘हम मांग करते हैं कि किसानों के साथ वार्ता प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए क्योंकि वे पिछले नौ महीने से अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हुए हैं. हम मांग करते हैं कि बिना चर्चा के लागू किए गए ये तीनों काले कानून वापस लिए जाने चाहिए.’

कांग्रेस नेता ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को हर किसान का कानूनी अधिकार बनाया जाए क्योंकि अब वे केवल जुमले नहीं चाहते हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के वादे का भी उल्लेख किया. वल्लभ ने दावा किया कि अगर एक किसान परिवार की 2012-2013 की आय के साथ 2018-2019 की आय की तुलना की जाए तो एक किसान की आय 48 फीसदी से घटकर 38 फीसदी रह गई है.

वाम दलों ने लोगों से भी समर्थन का आग्रह किया

वाम दलों ने केंद्र के तीन कृषि कानूनों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) द्वारा 27 सितंबर को बुलाए गए भारत बंद को समर्थन देने के ऐलान के साथ ही लोगों से भी बंद में शामिल होने की अपील की है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने एक संयुक्त बयान में कहा कि कृषि कानूनों को निरस्त करने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर किसानों का ‘ऐतिहासिक’ संघर्ष 10वें महीने में पहुंच गया है.

वाम दलों ने सरकार पर “हठ करने” का आरोप लगाया और कहा कि केंद्र संघर्षरत किसानों से बातचीत करने से इनकार कर रहा है. वाम दलों ने केंद्र सरकार के इस ‘हठ’ की निंदा करते हुए मांग की कि नए कृषि कानूनों को तुरंत निरस्त किया जाए, एमएसपी की गारंटी दी जाए, राष्ट्रीय मौद्रिकरण पाइपलाइन को खत्म किया जाए तथा श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए.

किसानों को मिला बैंक ऑफिसर्स यूनियन का समर्थन

अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ (AIBOC) ने संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 27 सितंबर को किसान संगठनों द्वारा बुलाए गए ‘भारत बंद’ को समर्थन देने की घोषणा की. एआईबीओसी ने सरकार से संयुक्त किसान मोर्चा की मांगों पर उसके के साथ फिर से बातचीत शुरू करने और तीन विवादित कृषि कानूनों को रद्द करने का अनुरोध किया. यूनियन ने एक बयान में कहा कि एआईबीओसी के सहयोगी और राज्य इकाइयां सोमवार को पूरे देश में किसानों के विरोध प्रदर्शनों के साथ एकजुटता दिखायेंगी.

इस महीने की शुरुआत में जारी एनएसएस भूमि और परिवारों के पास पशुधन और कृषि परिवारों की स्थिति आकलन, 2018-19 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए, संघ ने कहा कि यह इंगित करता है कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का सरकार का लक्ष्य, दूर का सपना लगता है. प्रति कृषि परिवार का औसत बकाया ऋण वर्ष 2018 में बढ़कर 74,121 रुपये हो गया, जो वर्ष 2013 में 47,000 रुपये था. कृषि परिवारों की बढ़ती कर्जदारी, गहराते कृषि संकट को दर्शाती है.

एलडीएफ ने केरल में हड़ताल का आह्वान किया

केरल में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने के मद्देनजर 27 सितंबर को राज्य-व्यापी हड़ताल का आह्वान किया. संयुक्त किसान मोर्चा ने पिछले साल नवंबर से जारी अपने आंदोलन को मजबूत करने के लिए 27 सितंबर को ‘भारत बंद’ की घोषणा की है. ऐसे में एलडीएफ ने किसानों के साथ एकजुटता दर्शाने के लिए इसी दिन राज्य में हड़ताल का आह्वान किया है.

एलडीएफ के संयोजक एवं माकपा के कार्यकारी सचिव ए विजयराघवन ने कहा कि केंद्र की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ राज्य में होने वाले विरोध-प्रदर्शन में पांच लाख लोग हिस्सा लेंगे. उन्होंने दावा किया कि 100 से अधिक संगठनों ने एलडीएफ के प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया है.

तेजस्वी यादव बोले- महागठबंधन का किसानों के बंद को समर्थन

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा, ‘महागठबंधन की सभी पार्टियों (CPI, CPM, CPIML, RJD और कांग्रेस) ने बैठक की. 27 तारीख को किसानों ने भारत बंद की घोषणा की है. हम सभी ने निर्णय लिया है कि किसानों द्वारा लिए गए भारत बंद आंदोलन का महागठबंधन की सभी पार्टियां समर्थन करेंगी.’

मायावती की पार्टी भी बंद में होगी शामिल

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा के ‘भारत बंद’ का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार से इन कानूनों को वापस लेने की मांग की है. बसपा प्रमुख ने ट्वीट किया, ‘केन्द्र द्वारा जल्दबाजी में बनाए गए तीन कृषि कानूनों से असहमत और दुखी देश के किसान इनकी वापसी की मांग को लेकर लगभग 10 महीने से पूरे देश व खासकर दिल्ली के आसपास के राज्यों में आन्दोल कर रहे हैं और उन्होंने सोमवार को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है जिसके शांतिपूर्ण आयोजन को बसपा का समर्थन.’

अपने सिलसिलेवार ट्वीट में मायावती ने कहा, ‘साथ ही, केन्द्र सरकार से पुनः अपील है कि वह किसान समाज के प्रति उचित सहानुभूति व संवेदनशीलता दिखाते हुए तीनों विवादित कृषि कानूनों को वापस ले तथा आगे उचित सलाह-मशविरा व इनकी सहमति से नया कानून लाए ताकि इस समस्या का समाधान हो. अगर किसान खुश व खुशहाल होंगे तो देश खुश व खुशहाल होगा.’ संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि कानूनों के खिलाफ 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर की किसान महापंचायत में 27 सितंबर को ‘भारत बंद’ बुलाए जाने का एलान किया था.

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