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चीन की 928B टाइम बोट्स को टक्कर देने के लिए पैंगोंग झील में भारत हाई स्पीड इंटरसेप्टर बोट्स करेगा तैनात

भारत और चीन के बीच सीमा पर बीते एक महीने से तनाव बरकरार है। इसे दूर करने के लिए दोनों देशों के बीच कई दौर की मीटिंग हो चुकी है, लेकिन फिलहाल कोई रास्ता नहीं निकलता दिख रहा है। पिछले कुछ सालों से चीन की सेना पैंगोंग झील के किनारे सड़कें बना रही है। चीन जिस तरह पूर्वी लद्दाख में चालबाजियां दिखा रहा है, उससे यह आशंका गहरी होती जा रही है कि कहीं उसका नापाक इरादा पूरी पैंगोंग सो झील पर तो कब्जे की नहीं है।

इसलिए भारत भी हर तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। लद्दाख की पैंगोंग झील में भारतीय सैनिकों का रास्ता रोके बैठे चीन को सबक सिखाने और चीन की बड़ी नावों को टक्कर देने के लिए सरकार ने हाई स्पीड वाली इंटरसेप्टर बोट्स (नाव) पैंगोंग झील भेजने का की तैयारी में है। इस प्लान को जल्द अमल में लाया जा सकता है। इन नावों में निगरानी रखने के तमाम नए उपकरण होंगे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार साल 2012-2013 के बाद से 13,900 फीट की ऊंचाई पर भारत की 17 क्वीआरटी (क्विक रिऐक्शन टीम) बोट्स झील में पट्रोलिंग का काम करती हैं। भारत को ये नाव करीब 8 साल पहले मिली थीं। लेकिन अभी चीन वहां तैनाती बढ़ा रहा है, बड़ी नावें भी ले आया है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी अभी भारी 928बी टाइम बोट्स का इस्तेमाल कर रही है जिनसे टक्कर के लिए भारत को नई नावें भेजनी होंगी।

लेकिन योजना को एक बड़ी तार्किक चुनौती का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि ऐसी ऊंचाई वाली जगह पर इन नावों को किसी भी चीज से भेजना इतना आसान नहीं है। फिलहाल प्लानिंग यह है कि इन्हें सी -17 ग्लोबमास्टर-III विमानों द्वारा विघटित और एयरलिफ्ट करना पड़ सकता है।  लेह और उसके बाद वहां से इन्हें आगे लेकर जाया जाए। हालांकि, इसमें कुछ वक्त तो लगेगा ही।

रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया है। 134 किमी लंबी पैंगोंग झील का दो-तिहाई हिस्सा चीन द्वारा नियंत्रित किया जाता है और लंबे समय से दोनों देशों के लिए एक फ़्लैश बिंदु रहा है। भारतीय सैनिकों को फिंगर 4 और फिंगर 8 के बीच के क्षेत्र में गश्त करने से रोक दिया गया है, ऊंची जगहों पर उसने अपने सैनिक बैठा दिए हैं। अपनी (चीन) सीमा में उसका निर्माण कार्य भी जारी है।

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