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कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों की जानकारी न देने पर SC ने UP सरकार को लगाई फटकार, दो हफ्ते के अंदर पोर्टल अपडेट करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने कोरोना के दौरान मार्च 2020 से अब तक अनाथ हुए बच्चों की जानकारी अपलोड नहीं करने पर उत्तर प्रदेश सरकार (Government of Uttar Pradesh) को फटकार लगाई. कोर्ट ने पूछा कि यूपी सरकार ने अभी तक बाल स्वराज पोर्टल पर अनाथ हुए बच्चों का डेटा क्यों नहीं अपलोड किया. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के जिला अधिकारियों को निर्देश दिया कि पोर्टल पर डेटा अपलोड करने के लिए तुरंत उचित कदम उठाएं और जानकारी अपलोड करें. उत्तर प्रदेश के जिला अधिकारियों को दो हफ्ते के अंदर NCPCR के पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने को कहा गया.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी भी उत्तर प्रदेश में ऐसे बच्चों की पहचान की जा रही है, जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया है. कोर्ट ने सीडब्ल्यूसी को दो हफ्ते में जांच पूरी करने के निर्देश दिए और उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा. साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को बताने को कहा कि राज्य सरकार द्वारा घोषित योजनाओं के लाभों के विस्तार को लेकर क्या कदम उठाया गया.

UP सरकार ने दी बच्चों के लिए लागू योजना की जानकारी

मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि कोरोना के दौरान अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों को यूपी मुख्यमंत्री योजना के तहत 2500 रुपए हर महीने दिया जा रहा है. इस योजना को लागू किया गया है और बच्चों को इस योजना के तहत भुगतान राशि दी जा रही है. उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने प्राइवेट स्कूलों को निर्देश जारी किया है कि फीस का भुगतान नहीं कर पाने वाले छात्रों को स्कूल से निकाला नहीं जाएगा.

अनाथ हुए बच्चों की सुरक्षा को लेकर SC का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अनाथ हुए सभी बच्चों की सुरक्षा को लेकर सभी पर्याप्त कदम उठाए जाएं. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि कोविड के दौरान अनाथ होने वाले बच्चों के मामले सभी राज्य सरकारों को निजी स्कूलों में पढ़ने वाले ऐसे बच्चों कि शिक्षा को मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में उसी स्कूल में जारी रखने कि व्यवस्था करनी चाहिए, यह सुनिश्चित किया जाए कि ऐसे किसी बच्चे की पढ़ाई ना छुटे.

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