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स्‍मॉग से और ज्‍यादा जहरीली हुई राजधानी की हवा, दिल्‍ली-NCR का AQI रहा 372 ; फिलहाल राहत की उम्‍मीद नहीं

चार दिनों से लगातार दिल्ली की हवा जहरीली बनी हुई है. हवा की क्वालिटी गंभीर से भी बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गई. मंगलवार को राजधानी दिल्ली की वायु गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में है और वायु गुणवत्ता सूचकांक(AQI) 372 दर्ज किया गया है. वहीं उत्तर प्रदेश के नोएडा में वायु गुणवत्ता आज भी ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी हुई है. वायु गुणवत्ता और मौसम पूर्वानुमान और अनुसंधान प्रणाली (SAFAR) के मुताबिक नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक(AQI)आज 512 है.

सोमवार का औसत AQI 390 दर्ज किया गया जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी है. दिवाली पर आतिशबाजी और प्रतिकूल मौसम के बीच पराली जलाने के कारण दिल्ली में पिछले चार दिनों की हवा गुणवत्ता ‘गंभीर’ स्तर पर दर्ज की गई. शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51 और 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 और 200 को ‘मध्यम’, 201 और 300 को ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 और 500 को ‘गंभीर’ माना जाता है.

हालांकि, रविवार को पड़ोसी राज्यों में 5,450 खेतों में पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं, जो इस सीजन में अब तक की सबसे ज्यादा है. पिछले तीन दिनों में दिल्ली के वायु प्रदूषण 48 प्रतिशत प्रदूषण पराली जलाने के कारण हुआ. सोमवार को यह कम होकर 30 प्रतिशत हो गया. वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान एजेंसी SAFAR के अनुसार हवा की गति के कारण प्रदूषण कम हुआ है.

फिलहाल ‘बहुत खराब’ श्रेणी की ही रहेगी हवा

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि हवा की गति आठ किमी प्रति घंटे से 14 किमी प्रति घंटे के बीच थी. SAFAR ने हवा की गुणवत्ता में मामूली सुधार की भविष्यवाणी की लेकिन कहा कि यह अभी भी ‘बहुत खराब’ श्रेणी की ही बनी रहेगी. पिछले साल, दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने से होने वाली हिस्सेदारी 5 नवंबर को 42 प्रतिशत पर पहुंच गई थी. 2019 में पराली जलाने से 1 नवंबर को दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण का 44 प्रतिशत हिस्सा था.

सीपीसीबी ने छिड़काव के साथ जरूरी उपाय करने के दिए निर्देश

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने सोमवार को दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता की समीक्षा की और कहा कि अगले पांच दिनों के दौरान पराली जलाने का वायु प्रदूषण में योगदान बढेगा तथा वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘बहुत खराब’ और ‘गंभीर’ श्रेणियों के बीच रहेगा. स्थिति का जायजा लेते हुए बोर्ड ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारों को सड़कों पर पानी के छिड़काव के साथ-साथ श्रेणीबद्ध कार्रवाई योजना (ग्रैप) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया.

संबंधित एजेंसियों को संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों एवं समितियों को रोजाना रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है. सीपीसीबी ने कहा, ‘उप-समिति ने आठ नवंबर को एक बैठक बुलायी थी और उसने वायु गुणवत्ता दर्जे, मौसम एवं वायु प्रदूषण अनुमान की समीक्षा की.’

CPCB ने दिए  ईंट भट्टे-स्टोन क्रशर बंद करने के आदेश

1- सभी हॉट-मिक्स प्लांट और स्टोन-क्रशर बंद करने के आदेश दिए हैं. दिल्ली-एनसीआर में सभी एजेंसियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिये कम क़ीमतें तय करने को कहा है ताकि लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज़्यादा इस्तेमाल कर सकें.

2- राज्यों को एनसीआर में कोयला आधारित संयंत्रों के संचालन को कम करने के लिए गैस आधारित संयंत्रों से बिजली उत्पादन को बढ़ाने की बात कही गयी है.

3- नगर निगम के अधिकारियों को सड़कों की मशीनीकृत सफाई, पानी के छिड़काव के काम को तेज करने को कहा गया है.

4- दिल्ली-एनसीआर में फ़िलहाल ईंट भट्टे बंद रहेंगे.

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