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सुप्रीम कोर्ट ने पटाखे जलाने पर हाईकोर्ट के कंप्लीट बैन को किया खारिज, ग्रीन पटाखों को दी अनुमति

काली पूजा और दिवाली में पटाखे जलाने पर कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्ण प्रतिबंध के आदेश को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखे जलाने की अनमुति दे दी. बता दें कि कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस साल काली पूजा, दिवाली समारोह और कुछ अन्य उत्सवों के दौरान राज्य में सभी पटाखों की बिक्री, खरीद और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था. न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की एक विशेष पीठ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ग्रीन पटाखे जाने की अनुमति दे दी.

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में पटाखा फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया. इको फ्रेंडली और गुणवत्ता ‘मध्यम’ वाले ग्रीन पटाखों के उपयोग की अनुमति दी गई. सर्वोच्च न्यायालय का आदेश सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होगा और पश्चिम बंगाल अपवाद नहीं हो सकता है.

पहले प्रदूषण बोर्ड ने दी थी ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति

बता दें कि इसके पहले पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कालीपूजा-दिवाली और छठ पर्व के मौके पर बंगाल में पटाखों पर रोक लगा दी थी. दिवाली और छठ पर्व पर सिर्फ दो घंटे के लिए ग्रीन पटाखों को ही चलाने की इजाजत होगी और क्रिसमस और नये साल की पूर्व रात को लेकर 35 मिनट तक ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने पूरी तरह से पटाखे जलाने पर रोक लगा दी थी.

हाईकोर्ट ने पूरी तरह से पटाखे जलाने पर लगा दी थी रोक

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दो याचिकाओं में दावा किया गया था कि कलकत्ता न्यायालय द्वारा पारित पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश पूरी तरह से गलत था, जबकि पश्चिम बंगाल के भीतर जब शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों में अनुमेय सीमा में ग्रीन पटाखों के उपयोग की अनुमति दी है. पश्चिम बंगाल स्थित पटाखा संघ के अध्यक्ष और इस तरह के एक अन्य समूह द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कम से कम 30 प्रतिशत कम प्रदूषण उत्सर्जन वाले हरे पटाखे स्थानीय बाजार में पेश किए गए हैं. ये पर्यावरण के अनुकूल हैं. गौतम रॉय और सुदीप भौमिक की ओर से दायर दो याचिकाओं में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है.

सुप्रीम कोर्ट का 29 अक्टूबर का आदेश होगा लागू

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा कि अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं ताकि न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों का अक्षरश: पालन किया जाए. अगर कुछ भी SC के निर्देशों के विपरीत पाया जाता है, तो उचित कार्रवाई की जाएगी. आदेश में कहा गया है कि हम आक्षेपित आदेश को रद्द करते हैं और किसी भी इच्छुक व्यक्ति को सभी प्रासंगिक सामग्री रखकर उच्च न्यायालय से संपर्क करने की अनुमति देते हैं. उच्च न्यायालय उचित निर्देश पारित करने के लिए आगे जा सकता है. फिलहाल हम 29 अक्टूबर, 2021 का आदेश जारी रहेगा. संबंधित अधिकारी उक्त व्यवस्था का पालन करेंगे. पश्चिम बंगाल यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा सकता है कि राज्य में कोई प्रतिबंधित पटाखा न लाया जाए.

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