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LAC पर भारत ने बढ़ाई सर्विलांस की रेंज, हर मुश्किल का सामना करने के लिए तैयार

लद्दाख। पूर्वी लद्दाख में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद से भारतीय सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तैनाती बढ़ा दी है और चीन की हर हरकत पर पैनी नजर भी बनाए हुए हैं। 15 मई को हुई झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। जिसके बाद भारत ने एलएसी पर सैनिकों की तैनाती बढ़ाते हुए घातक कमांडों को भी भेज दिया, वहीं 20 मई के बाद सर्विलांस को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

अगर चीन इस बार किसी भी प्रकार का दुस्साहस करता है तो भारतीय सेना उसे मजा चखाने के लिए तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ों में भारत मजबूती के साथ टिका रहेगा। इसके साथ ही भारत का पलड़ा भी भारी है और रडार के जरिए 200 से 250 किमी दूर तक की निगरानी की जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन ने सीमा पर एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को तैनात किया है। हालांकि भारत के पास अभी डिफेंस सिस्टम नहीं है लेकिन जल्द ही इजरायल से मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

एयर टू एयर कॉम्बैट में मिलेगा फायदा

विशेषज्ञों के मुताबिक अगर चीन और भारत के बीच में एयर टू एयर कॉम्बैट होता है तो भौगिलिक आधार पर भारत को इसका फायदा होगा। चीन की हर चाल पर फिलहाल भारत की नजर है और उसके हर माइंड गेम को समझकर एक रणनीति बनाई जा रही है। बता दें कि वायुसेना ने अहम वायुसेवा अड्डों पर हवाई रक्षा प्रणालियां, लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर तैयार रखे हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि चीन के तिब्बत इलाके में मौजूद सभी एयरबेस 14 हजार फीट की ऊंचाई पर हैं। ऐसे में विमानों का ज्यादा हथियारों के साथ उड़ान भरना मुश्किल होता है। जबकि इंडियन एयरफोर्स के ज्यादातर एयरबेस समतल इलाकों में हैं जिसकी वजह से वह मजबूती के साथ उड़ान भर सकते हैं।

नौकाओं की हो रही तैनाती

पैंगोंग लेक पर गश्त बढ़ाने के लिए नौकाओं की तैनाती की जा रही है। भारतीय नौकाओं में सर्विलांस के उपकरण भी मौजूद रहेंगे। हालांकि लेक पर चीन की लेक आर्मी टुकड़ी की टाइप 928बी नौकाएं भी तैनात हैं। भारत और चीन सेनाओं के बीच मंगलवार को लेफ्टिनेंट जनरल स्तर पर तीसरे दौर की बातचीत हुई जिसके केंद्र में पूर्वी लद्दाख के टकराव वाले क्षेत्रों से सैनिकों को पीछे करने के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देना था। सरकारी सूत्रों ने बताया कि वार्ता पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास चुशूल सेक्टर में भारतीय जमीन पर हुई।

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