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पटना सीरियल ब्लास्ट केस में NIA कोर्ट ने सुनाया फैसला, 4 दोषियों को फांसी की सजा- दो को उम्रकैद

बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में साल 2013 में हुए सीरियल बम धमाकों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की विशेष अदालत ने 4 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है. वहीं दो दोषियों को उम्रकैद और 2 दोषियों को 10 साल कैद की सजा सुनाई गई है. इसके अलावा एक अन्य दोषी को 7 साल कैद की सजा दी गई है.

पटना के गांधी मैदान में 27 अक्टूबर 2013 को आयोजित भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ‘हुंकार रैली’ के मुख्य वक्ता तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी थे. नरेंद्र मोदी सहित पार्टी के नेताओं के मंच पर पहुंचने के करीब 20 मिनट पहले मैदान में सिलसिलेवार धमाके हुए थे, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी और 90 से अधिक लोग घायल हो गए थे. हालांकि इन धमाकों के बावजूद रैली हुई थी और नरेंद्र मोदी ने इसे संबोधित भी किया था.

पहला धमाका पटना रेलवे स्टेशन के पास हुआ था, उसके बाद गांधी मैदान के आसपास एक के बाद एक लगातार धमाके हुए थे. इस मामले में NIA ने घटना के अगले दिन से जांच शुरू कर दी थी. एनआईए ने एक साल के भीतर 21 अगस्त 2014 को कुल 11 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी. मामले में सुनवाई साल 2018 में शुरू हुई थी.

एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में किया गया बरी

विशेष लोक अभियोजक ललन प्रसाद सिंह ने बुधवार को बताया था कि एनआईए अदालत के स्पेशल जज गुरविंदर मल्होत्रा ने साल 2013 में पटना के गांधी मैदान में सिलसिलेवार ढंग से हुए बम धमाकों मामले में इम्तेयाज अंसारी, मुजीबुल्लाह, हैदर अली, फिरोज असलम, नोमान अंसारी, इफ्तिखार, अहमद हुसैन, उमेर सिद्दिकी और अजहरुद्दीन दोषी करार दिया जबकि साक्ष्य के अभाव में फखरुद्दीन को बरी घोषित किया.

उन्होंने बताया कि इस मामले में एनआईए ने 11 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था जिनमे से एक अभियुक्त की उम्र कम होने के कारण उसका मामला किशोर अदालत में हस्तांतरित हो गया था. उनके अनुसार बाकी बचे 10 अभियुक्तों के खिलाफ एनआईए अदालत में सुनवाई चली.

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