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‘मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, ये कोई बड़ी बात नहीं’- बीजेपी कार्यकारिणी से नाम हटाए जाने पर बोलीं मेनका गांधी

बीजेपी की कार्यकारिणी से नाम हटाए जाने पर मेनका गांधी ने कहा है कि इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. बता दें कि हालही में नई कार्यकारिणी के सदस्यों के नामों का ऐलान हुआ है. इसमें मेनका गांधी और उनके बेटे वरुण गांधी का नाम नहीं था. जिसके बाद कई तरह के कयास लगाए जाने लगे. दोनों को कार्यकारिणी से हटाए जाने को वरुण गांधी के किसान समर्थित बयानों से जोड़कर देखा जा रहा था. हालांकि मेनका गांधी ने सुल्तानपुर में आज इन कयासों को सिरे से खारिज कर दिया.

मेनका गांधी ने आज सुल्तानपुर में मीडिया से बातचीत में कहा कि कार्यकारिणी बदली जाती है. यह पार्टी का हक है. इसमें चिंता करने की कोई भी बात नहीं है. जब मेनका गांधी से बीजेपी की नई कार्यकारिणी में उनका नाम न होने की बात पूछी गई तो उन्होंने कहा कि इससे उन्हें या किसी और को कोई फर्क नहीं पड़ा. उन्होंने साफ किया कि ये कोई बहुत बड़ी बात नहीं है.

‘कार्यकारिणी में नाम न होना बड़ी बात नहीं’

बीजेपी नेता ने कहा कि कार्यकारिणी हर साल बदली जाती है. उन्होंने कहा कि वह 25 साल से कार्यकारिणी का हिस्सा थीं अगर अब इसे बदल दिया गया तो इसमें कौन सी बड़ी बात हो गई. मेनका गांधी ने कहा कि नए लोगों को भी मौका मिलना चाहिए. इसमें चिंता करने जैसी कोई बात नहीं है. उन्होंने ये बात सुल्तानपुर दौरे पर मीडिया से कहीं. ये बात किसी से छिपी नहीं है कि आजकल वरुण गांधी पार्टी विरोधी बयान दे रहे हैं. लखीमपुर खीरी में किसानों की मौत के बाद उन्होंने कई ट्वीट कर सरकार पर सवाल दागे थे. इससे पहले भी वह किसानों के समर्थन में कई ट्वीट कर चुके हैं. वरुण गांधी ने सरकार को किसानों की समस्या सुलझाने की सलाह दी थी. बीजेपी ने अचानक कार्यकारिणी से मेनका और वरुण का नाम हटा दिया. जिसके बाद इसे सांसद वरुण गांधी के हालिया बयानों से जोड़कर देखा जा रहा है. लेकिन अब मेनका गांधी ने इस पर सफाई दी है.

किसानों के समर्थन में वरुण गांधी का ट्वीट

BJP सांसद वरुण गांधी ने लखीमपुर खीरी में हुई घटना की तीखी आलोचना की थी. वरुण गांधी ने इस दौरान बेहतर क्वालिटी का एक वीडियो ट्वीट किया था. जिसमें बताया गया था कि लखीमपुर खीरी में क्या हुआ था. वरुण ने ट्वीट के जरिए लिखा कि वीडियो बिल्कुल स्पष्ट है. हत्या के जरिए प्रदर्शनकारियों को चुप नहीं कराया जा सकता. निर्दोष किसानों के खून के प्रति जवाबदेही होनी चाहिए और अहंकार और क्रूरता का संदेश हर किसान के दिमाग में आने से पहले न्याय दिया जाना चाहिए.

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