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अफगानी सरकार को अंतरराष्ट्रीय मान्यता से पहले देश के भीतर की वैधानिकता अहम, NSA डोभाल के साथ समकक्षों की बैठक में उठी आवाज

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सोमवार को दिल्ली में उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान के अपने समकक्षों से मुलाकात की और अफगानिस्तान में मौजूदा हालात पर चर्चा की. सूत्रों ने बताया कि उज्बेकिस्तान के साथ बैठक में अफगानिस्तान चर्चा का प्रमुख मुद्दा रहा. दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि अफगानिस्तान का भविष्य अफगान नागरिकों को खुद तय करना होगा.

सूत्र ने जानकारी दी कि इस बैठक में अफगानिस्तान में मंडरा रहे मानवीय संकट पर भी चर्चा हुई. ताजिकिस्तान के साथ बैठक के दौरान डिफेंस, बॉर्डर मैनेजमेंट और बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और ज्यादा मजबूत बनाने पर बात हुई. इसके अलावा, हाल के दिनों में अफगानिस्तान से आतंकवादी खतरों में तेज वृद्धि पर भी चिंता व्यक्त की गई. ताजिक पक्ष ने अफगानिस्तान में स्थिति की गंभीरता पर प्रकाश डाला.

 

अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों की भूमिका पर जोर

सूत्रों ने कहा कि वे इस बात पर भी सहमत हुए कि पड़ोसी राज्यों को अफगानिस्तान में रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए. इतना ही नहीं उन्होंने अफगानिस्तान के दीर्घकालिक आर्थिक विकास की आवश्यकता पर भी रोशनी डाली. उन्होंने महसूस किया कि अफगानिस्तान के भीतर किसी भी अफगान सरकार की वैधता उसकी अंतरराष्ट्रीय मान्यता जारी करने से पहले महत्वपूर्ण थी. दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान के लोगों को मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों की भूमिका पर जोर दिया.

बैठक में शामिल नहीं हुआ चीन

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी शामिल हुए. भारत द्वारा अफगानिस्तान पर बुलाई गई इस सुरक्षा बैठक में चीनी पक्ष भी शामिल होने वाला था, हालांकि चीन ने कहा, ‘कार्यक्रम के समय से संबंधित कुछ मुद्दों के कारण बैठक में शामिल होना असुविधाजनक है.’ चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा, ‘हम भारतीय पक्ष को अपना जवाब पहले ही दे चुके हैं.’

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