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जम्मू में सुरक्षा स्थिति का जायजा ले रहे सेना प्रमुख एमएम नरवणे, बोले- पुंछ मुठभेड़ में आतंकियों की तलाश जारी

सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे (MM Naravane) जम्मू क्षेत्र के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे. इस दौरान वह नियंत्रण रेखा के साथ आगे के इलाकों का दौरा करेंगे, जहां सुरक्षा बल एक सप्ताह से आतंकवादियों के एक समूह को ट्रैक करने की कोशिश कर रहे हैं. इसमें अब तक नौ सैनिक शहीद हुए हैं. सूत्रों ने बताया कि सोमवार सुबह भी दोनों ओर से जोरदार फायरिंग हुई. सुरक्षा समीक्षा के दौरान सेना प्रमुख राजौरी-पुंछ मार्ग पर भीम्बर गली का दौरा करेंगे, जहां 14 अक्टूबर को आतंकवादियों के साथ गोलीबारी में चार सैनिक मारे गए थे.

दोनों पक्षों के बीच पहली मुठभेड़ 11 अक्टूबर को पुंछ जिले के देहरा की गली इलाके में हुआ था, जिसमें एक जेसीओ सहित पांच सैन्यकर्मी मारे गए थे. यह पिछले 17 वर्षों में क्षेत्र में सबसे घातक मुठभेड़ थी. अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद से अब तक जम्मू-कश्मीर के पुंछ में सबसे लंबा ऑपरेशन चलाया जा रहा है. सेना ने ट्वीट कर बताया कि जनरल नरवणे को व्हाइट नाइट कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग से सुरक्षा स्थिति और ऑपरेशनल तैयारियों के बारे में अपडेट मिलेगा और अग्रिम इलाकों में मौजूद सैनिकों और कमांडरों से बातचीत करेंगे.

इलाके की पूरी तरह घेराबंदी कर अभियान चला रही पुलिस-सेना

सूत्रों ने कहा कि पुलिस ने भाटा दुरियां इलाके में आतंकवादियों को रसद मुहैया कराने के संदेह में पांच और ग्रामीणों को हिरासत में लिया है. आतंकवादियों को मारने के अभियान को अब तक बहुत कम सफलता मिली है. हालांकि, पुलिस और सेना ने मिलकर इलाके की पूरी तरह घेराबंदी कर रखी है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आतंकवादी भाग न पाएं. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि जिन अलग-अलग दिशाओं से फायरिंग हो रही है, उसे देखते हुए “वे एक बड़े समूह के रूप में प्रतीत होते हैं”. पहले अनुमान था कि समूह की संख्या चार-पांच के आसपास है. सूत्रों ने यह भी स्वीकार किया कि आतंकी उच्च प्रशिक्षित थे, चतुराई से आगे बढ़ रहे थे और कम से कम फायरिंग कर रहे थे, कोई घबराहट नहीं दिखा रहे थे.

अभियान में सेना के जवान शहीद

जबकि सेना के सूत्रों ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि 11 और 14 अक्टूबर की घटनाओं में एक ही समूह शामिल था, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि माना जाता है कि वे मिलकर काम कर रहे थे और उन्होंने स्थान बदल दिया था. उन्होंने कहा कि खुफिया इनपुट के बाद, हम पिछले ढाई महीने से इलाके में आतंकवादियों के विभिन्न समूहों का पीछा कर रहे हैं. अगस्त-सितंबर में राजौरी के सामान्य क्षेत्र में तीन मुठभेड़ों में सेना शामिल थी. 6 अगस्त को थानामंडी के पंगई जंगल में दो आतंकवादी मारे गए थे, 19 अगस्त को इसी इलाके में एक जेसीओ समेत दो जवान मुठभेड़ में शहीद हो गए थे और 13 सितंबर को राजौरी के मंजाकोट में एक आतंकवादी मारा गया था.

जम्मू के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह ने रविवार को भीमबेर गली का दौरा किया और अधिकारियों ने जल्द ही उग्रवादियों के खात्मे का भरोसा जताया. पुंछ-सूरनकोट-राजौरी राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा है, जिसे गुरुवार शाम से नागरिक यातायात के लिए बंद कर दिया गया था. हालांकि, सोमवार को इसे आंशिक रूप से फिर से खोल दिया गया है.

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