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बिहार चुनाव के तारीखों पर एनडीए गठबंधन में गांठ, जदयू-बीजेपी से अलग लोजपा की राय

इस साल अक्टूबर-नवंबर में बिहार में विधानसभा के चुनाव प्रस्तावित है। हालांकि कोरोनावायरस के बीच चुनाव कराने को लेकर पक्ष और विपक्ष बिहार में एक दूसरे के सामने आ खड़ा है। जहां पक्ष चुनाव कराने को लेकर हामी भर रहा है तो विपक्ष चुनाव को टालने की बात कर रहा है। लेकिन चुनाव की तिथि को लेकर बात उस समय बढ़ गई जब एनडीए में ही इसको लेकर फूट दिखाई दी। दरअसल, सत्ता में साझीदार लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान ने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को सहमति प्रदान करते हुए यह कह दिया कि फिलहाल चुनाव कराना खतरे से खाली नहीं है। इसके बाद कहीं ना कहीं सत्ता पक्ष पर विपक्ष चुनाव को आगे बढ़ाने का दबाव बनाने लगा। अब इसी को लेकर बिहार की राजनीति एक नई दिशा में बढ़ गई है।

चिराग पासवान के चुनाव टालने की सलाह पर भाजपा और जनता दल यू के नेताओं ने परोक्ष हमला बोल दिया। भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने चिराग पासवान पर निशाना साधते हुए एक ट्वीट भी कर दिया। अपने ट्वीट में सुशील मोदी ने लिखा कि कमजोर विद्यार्थी ही परीक्षा टालने की बात करता है। इस ट्वीट को लेकर बवाल मचना लाजमी था। केंद्रीय नेतृत्व के दखल के बाद सुशील मोदी को अपनी ट्वीट डिलीट करनी पड़ी। इसके बाद भाजपा की ओर से डैमेज कंट्रोल की कोशिश की जाने लगी। बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने साफ तौर पर ट्वीट कर कहा कि गठबंधन में किसी तरह का मतभेद नहीं है। बाद में बिहार बीजेपी की तरफ से अधिकारिक बयान जारी किया गया जिसमें कहा गया कि राज्य में जेडीयू और एलजेपी के साथ मिलकर ही भाजपा चुनाव लड़ेगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने राजग गठबंधन को अटूट बताया।

संजय जायसवाल ने कहा कि गठबंधन के तौर पर तीनों दलों (भाजपा-जदयू-लोजपा) की एकता पूरी तरह से अक्षुण्ण है और हम पूरी मजबूती से आगामी चुनाव एकसाथ मिलकर लड़ेंगे। जायसवाल ने कहा कि हमारे गठबंधन में लोकतंत्र है और सभी अपनी बातें और विचार रखने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन राजग के तीनों दलों के लिए जनता का विकास ही प्रमुख है। हमारी नीतियां जनता के इर्दगिर्द ही तय होती हैं। इसीलिए हमारे गठबंधन में न तो आपसी मतभेद हैं और न ही मनभेद। गठबंधन के तौर पर हमारे तीनों दलों का ध्येय बिलकुल साफ़ है, हमारे निर्णयों में एकरूपता है जो हमारे गठबंधन की अंदरुनी एकता को दर्शाता है।

लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि यदि कोविड-19 के फैलने के दौरान चुनाव कराये जाते हैं, तो बहुत कम मतदान प्रतिशत रह सकता है। साथ ही कहा कि चुनाव लोगों की जान खतरे में डाल सकते हैं। चुनाव आयोग ने इसके कार्यक्रम के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। पासवान ने कहा, ‘‘न सिर्फ बिहार, बल्कि पूरा देश कोरोना वायरस से प्रभावित है। इसने केंद्र और बिहार के वित्त को प्रभावित किया है। इन सबके बीच चुनाव कराने से राज्य पर और अधिक वित्तीय बोझ बढ़ेगा।

वहीं, पटना स्थित राजद के प्रदेश कार्यालय में पार्टी नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके सहयोगी दल भाजपा पर प्रहार करते हुए कहा, अब सुनने में आ रहा है कि ये लोग एक-एक हफ्ते तक रैली करेंगे। आप रैली कीजिए। भाजपा के लोग ऑनलाइन रैली करेंगे और बिहार के लोग मरते रहेंगे। लाशों के ढेर पर चुनाव…। चुनाव किस लिए होता है? लोगों की जिंदगी बचाने, उनका जीवन बेहतर बनाने और उन्हें आगे ले जाने के लिए। ये लोगों को मार कर चुनाव कराना चाहते हैं। बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी ने नीतीश पर प्रहार जारी रखते हुए कहा, आखिर चुनाव की इतनी जल्दबाजी क्यों है? किस बात की घबराहट है?’’

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