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निर्यात बढ़ाएगी योगी सरकार, 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य

लखनऊ: सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बुधवार को खादी भवन के सभागार समीक्षा बैठक की. इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से निर्यात को 1.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर तीन लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है. प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण वित्तीय वर्ष 2020-21 निर्यातकों के लिए अत्यन्त कठिन रहा है. राज्य सरकार उत्तर प्रदेश निर्यात संवर्धन परिषद के माध्यम से अगले पांच से 10 वर्षों के लिए ‘निर्यात रणनीति’ तैयार कर रही है. ताकि निर्यातकों को कोविड-19 के संकट के कारण उत्पन्न आपदा से उबरने में और राज्य से निर्यात वृद्धि में सहायता मिल सके.
बैठक में सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय परामर्शदात्री संस्था ‘प्राइस वाटर हाउस कूपर्स’ को उत्तर प्रदेश निर्यात संवर्धन परिषद का सलाहकार नियुक्त किया गया है. इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव डॉ. नवनीत सहगल ने कहा कि अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर यूपी में वर्तमान व्यापार अवसरों और विनिर्माण एवं निर्यात क्षमता की समीक्षा के माध्यम से निर्यात के लिए सबसे ज्यादा संभावना वाले प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान की गई है.
निर्यात हब बनाए जाएंगे
उत्तर प्रदेश के 25 मुख्य जिलों में ऐसे 17 प्राथमिक क्षेत्रों का चिन्हीकरण किया गया है. यहां निर्यात हब बनाए जाएंगे. इन सभी चिन्हित प्राथमिक क्षेत्रों में सर्वोच्च पांच प्राथमिक क्षेत्रों एवं प्रधान निर्यात हब जो कि उत्तर प्रदेश से निर्यात को बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा सकते हैं. इनमें इलेक्ट्रानिक एण्ड इलेक्ट्रिकल आइटम व अपेरल-गौतमबुद्धनगर, चर्म एवं चर्म उत्पाद-कानपुर नगर, आगरा और उन्नाव, मशीनरी उपकरण-गौतमबुद्धनगर एवं गाजियाबाद और आग्रेनिक कैमिकल्स शामिल हैं.
वैश्विक बाजार उपलब्ध
यूपी के वर्तमान निर्यातकों द्वारा नए उत्पादों और नए बाजारों के रूप में नवीन अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया गया. साथ ही वैश्विक बाजारों में वर्तमान निर्यात बास्केट का विस्तार करने के लिए प्रेरित किया गया है. वैश्विक बाजार उपलब्ध उप्र से निर्यातित मुख्य उत्पाद इलेक्ट्रिकल मशीनरी और इलेक्ट्रानिक, अपेरल, फुटवियर, मशीनरी, कालीन जैसे उत्पाद हैं, जबकि यूएसए, यूएई, वियतनाम, जर्मनी, रूस आदि मुख्य बाजार है.
अध्ययन के अन्तर्गत न केवल यूपी के निर्यातकों के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों और मुख्य समस्याओं को चिन्हित किया गया है, बल्कि उनके समाधान के लिए उपाय भी किए गए हैं. इस मौके पर पीडब्ल्यूसी के कंसल्टेंट द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष ड्राफ्ट रिपोर्ट के निष्कर्षों को भी प्रस्तुत किया गया.

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