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गिरफ्तारी के बाद विकाश दुबे के गुर्गे का बड़ा खुलासा, कहा-थाने से आये फोन के बाद हुई वारदात

कानपुर। कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी माफिया सरगना विकास दुबे के एक इनामी गुर्गे को रविवार को कल्याणपुर में मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) अनिल कुमार ने बताया कि दुबे के गुर्गे दया शंकर अग्निहोत्री को कल्याणपुर में पुलिस से मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया। उसके पैर में गोली लगी है। उसे लाला लाजपत राय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। पकड़े गये बदमाश ने अस्पताल पहुंचे संवाददाताओं के सामने कहा कि गत दो/तीन जुलाई की रात को बिकरू गांव में वारदात से पहले विकास दुबे के पास चौबेपुर थाने से किसी का फोन आया था, जिसके बाद उसने पुलिस से सीधे टक्कर लेने के लिये उसे एवं अन्य साथियों को फोन करके अपने घर बुलाया था।

अग्निहोत्री का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब चौबेपुर के थानाध्यक्ष विनय तिवारी को मुखबिरी के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। कानपुर के पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल के मुताबिक तिवारी को हिरासत में नहीं लिया गया है बल्कि उन्हें पुलिस लाइन भेजा गया है। मामले की जांच की जा रही है। अगर उनके खिलाफ एक भी सबूत मिला तो उन्हें हिरासत में लेकर कार्यवाही की जाएगी। घात लगाकर हुए हमले में आठ पुलिसकर्मियों की मौत होने के बाद की गई कार्यवाही में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के घर को ढहा दिया गया है। यह कार्यवाही किस कानून के तहत की गई, इस सवाल पर पुलिस महानिरीक्षक ने कहा पुलिस को सूचना मिली थी कि दुबे ने अपने घर मेंबने बंकर और दीवारों के अंदर बड़े पैमाने पर हथियार और गोला-बारूद जमा कर रखे हैं। हथियारों की तलाश के दौरान जब दीवारें तोड़ी गई तो छत भी ढह गई।

इस कार्रवाई के दौरान घर से भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए। गौरतलब है कि गत दो/तीन जुलाई की दरम्यानी रात को चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को एक मामले में पकड़ने गयी पुलिस टीम पर विकास के घर की छत पर मौजूद बदमाशों ने गोलियां बरसायी थीं। इस वारदात में एक पुलिस उपाधीक्षक और तीन उपनिरीक्षकों समेत आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर मृत पुलिसकर्मियों के हथियार लेकर भाग गए जिनकी तलाश के लिए सघन अभियान चलाया जा रहा है। इस बीच, पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद वारदात के तीन दिन बाद में भी विकास दुबे को पकड़ा नहीं जा सका है। करीब पांच दर्जन मुकदमों में आरोपी दुबे की तलाश में पुलिस की 25 से ज्यादा टीमें लगी हैं।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि दुबे ने घटनास्थल से भागने से पहले सभी सीसीटीवी कैमरा बंद कर दिए थे और डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर को अपने साथ ले गया। पुलिस पड़ोसी देश नेपाल तथा अन्य राज्यों की सीमा के आसपास भी उसकीतलाश कर रही है उसका आखिरी लोकेशन औरैया में मिला था। पुलिस को शक है कि वह या तो नेपाल या फिर मध्य प्रदेश भाग गया है। पुलिस ने उसे पकड़वाने के लिए घोषित इनामी राशि 50 हजार रुपये से बढ़कार एक लाख कर दी है। पुलिस उस व्यक्ति से भी पूछताछ कर रही है जिसने वारदात से ऐन पहले बिक्री गांव की विद्युत आपूर्ति बंद की थी। सूत्रों के मुताबिक उस व्यक्ति ने स्वीकार किया है कि उसने चौबेपुर थाने से कॉल आने के बाद विद्युत आपूर्ति बंद की थी। हालांकि, पुलिस अधिकारी ना तो इसे स्वीकार कर रहे हैं और ना ही इनकार। पुलिस ने संबंधित विद्युत उपकेंद्र के उप मंडलीय अधिकारी तथा एक अन्य कर्मचारी को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।

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