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कैसे हुई अमेठी के DPRO की गिरफ्तारी ? जानिए गिरफ्तार करवाने वाले शख्स की हकीक़त।

अमेठी जिला पंचायत राज अधिकारी श्रेया मिश्रा घूंस कांड मामले में विजिलेंस टीम के द्वारा जिला अस्पताल में मेडिकल करवाने के उपरांत डीपीआरओ को ले जाया गया गोरखपुर । मेडिकल कराने के दौरान डीपीआरओ ने जिला अस्पताल गौरीगंज में मीडिया कर्मियों से बात करते हुए रोते हुए बताया की उनके कार्यालय के बाबू के द्वारा सूचना दी गई जिसमें सफाई कर्मी सुशील कुमार उनसे मिलना चाहता था । लेकिन उन्होंने मना कर दिया था जिसके बाद सफाई कर्मी गेट के बाहर खड़े गार्ड को धक्का देते हुए जबरन उनके चेंबर में घुस गया और घुसते ही उनके हाथ में पैसे रखकर वह पैर पकड़कर माफ करने की बात कहने लगा । पैसा मेज पर रख कर उन्होंने सफाई कर्मी से अपना पैर छुड़ाने का प्रयास किया तभी विजिलेंस टीम ने अंदर आकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया । डीपीआरओ ने बड़ा खुलासा करते हुए यह भी कहा कि उनकी जॉइनिंग के 5 माह बाद से ही उनके खिलाफ साजिश रची जा रही थी । जिसमें अपने कार्यालय के कुछ कर्मचारी के शामिल होने की भी बात कही । आइए आपको पैसे फेंक कर डीपीआरओ को गिरफ्तार करवाने वाले कर्मचारी की हकीकत भी बता दें – सुशील कुमार सिंह नाम का यह शख्स मूल रूप से कन्नौज जनपद का रहने वाला है । अमेठी जनपद के बाजार शुकुल ब्लॉक क्षेत्र में सफाई कर्मी के पद पर तैनात हैं । वर्ष 2009 में किसकी नियुक्ति हुई थी नियुक्ति से पूर्व यह एक अधिशासी अभियंता के यहां चालक की नौकरी करता था । जहां से 1 करोड़ रुपए चोरी का आरोप भी इसके ऊपर लगा था जिसमें से छानबीन के दौरान 80 लाख रुपए नगर इसके लखनऊ स्थित तेलीबाग के मकान से बरामद भी हुआ था। जिसके बाद वह मकान सील कर दिया गया था । इसी मामले में या दो बार जेल भी जा चुका है जिसमें पहली बार 18 महीने के लिए तो दूसरी बार 6 महीने जेल में गुजार कर आया है। जिसका मुकदमा अभी भी न्यायालय में चल रहा है। ऐसे में सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस दागदार छवि के कर्मचारी को वर्ष 2009 में सरकारी नौकरी कैसे मिल गई ? जबकि इसके ऊपर चोरी जैसे गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत होते हुए गतिमान है । सूत्र बताते हैं कि इसका एक भाई बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में सचिवालय में कार्यरत है । उसी के इशारे पर इसका खेल चलता है। अपने सेवाकाल के दौरान यह सफाई कर्मी दो बार निलंबित भी हुआ है जिसमें पहली बार अगस्त 2010 से अप्रैल 2012 तक तथा दूसरी बात नवंबर 2016 से जून 2018 तक वह निलंबित रहा है । इसीलिए इन्हीं सब कारणों के चलते वह अभी अपने मूल वेतन पर ही चल रहा है । उसका इंक्रीमेंट रुका हुआ है और इसी इंक्रीमेंट एवं निलंबन अवधि के दौरान वेतन भत्तों के बकाया भुगतान के लिए वह लगातार डीपीआरओ पर दबाव बना रहा था । जब डीपीआरओ नहीं मानी तो वह गलत तरीके से पहुंच कर विजिलेंस टीम के द्वारा उन्हें गिरफ्तार करवा दिया कर और उनकी छवि धूमिल करने का कुत्सित प्रयास किया जिसमें वह सफल भी रहा। यही नहीं इस के कारनामे यही नहीं रुकते हैं कारनामों में एक नया अध्याय उस समय भी जुड़ा जब वह अपने साथी के खाते से गलत तरीके से 13 लाख रुपए निकाल लिए थे मामला जब पुलिस के संज्ञान में पहुंचा तब स्थानीय पुलिस के द्वारा मध्यस्थता करते हुए सुलह सपाटा करवा दिया गया । जिसमें प्रेम कुमार को एक बार 10 लाख रुपए तथा दूसरी बार 1 लाख 75 हजार रुपए इसने दिए। लेकिन शेष 1 लाख 25 हजार रुपए अभी भी इसने हड़प रखे हैं । ऐसे में बड़ा सवाल यह भी है जब इतने बड़े चोर, फ्रॉड और जालसाज लोग सफाई कर्मी बनेंगे तो जहां उनकी नियुक्ति होगी वहां पर सफाई कैसे होगी ? ऐसे लोग जहां पर रहेंगे वहां पर चोरी डकैती जैसी गंभीर घटनाओं को बढ़ावा देंगे और ऐसे लोग गंदी नालियों को साफ करने के बजाए क्षेत्र के जनता की जेबे ही साफ कर देंगे । ऐसे खराब C.R. वाले लोगों को तत्काल प्रभाव से अधिकारियों एवं शासन को बर्खास्त कर देना चाहिए। सूत्र बताते हैं कि आज तक इसने अपने किसी भी कर्तव्यों का सम्यक रूप से निर्वहन नहीं किया है। जब मीडिया कर्मी के द्वारा सुशील कुमार सिंह से दूरभाष पर वार्ता की गई तब उसने अपने ही मुंह से जेल जाने की अवधि को बताते हुए कहा कि यह सब मत उधेड़िये । जितना अभी है उतना ही दिखाइए प्लीज नहीं तो हमारा ही नुकसान होगा मैं एक ही लोगों की नजर में आ जाऊंगा । उतना ही लिखिए जितने से काम चल जाए। जब उसके द्वारा अपने साथी के खाते से गलत तरीके से 13 लाख रुपए निकाल लेने की बात की गई तब उसने साफ तौर पर कहा हमारा उसका जो भी लेनदेन था उसको हमने डीडी के माध्यम से ले देकर खत्म कर दिया है अब कोई भीी बकाया नहीं है और उस मामले में कोई भी मुकदमा पंजीकृत नहीं हुआ था।

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