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अफसर पर गोली चलाने में पूर्व मंत्री बरी, 4 आरोपियों को मिली 10-10 साल की सजा

मुजफ्फरनगर: तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी रिकू सिंह राही पर लगभग 12 वर्ष पूर्व हुए जानलेवा हमले के मामले में विशेष एससी-एसटी कोर्ट ने चार आरोपित को दोषी मानते हुए 10-10 वर्ष कारावास की सजा सुनाई है. दोषियों में एक लेखाकार भी शामिल है. वहीं, सपा नेता व गोसेवा आयोग उप्र. के पूर्व अध्यक्ष मुकेश चौधरी सहित चार आरोपित साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है.
विशेष लोक अभियोजक यशपाल सिंह तथा एडीजीसी सहदेव सिंह ने बताया कि 26 मार्च 2009 को अज्ञात बदमाशों ने गोलियां बरसाकर तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी रिकू सिंह राही को गंभीर घायल कर दिया था. पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के विरुद्ध जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज किया.
अदालत का फैसला आने के बाद बरी हुए सपा नेता मुकेश चौधरी ने इसे सच्चाई की जीत बताते हुए खुशी जाहिर की. मामले में गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट में सपा नेता पहले ही बरी हो चुके हैं. उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि राजनीति के चलते उनका नाम इस प्रकरण में घसीटा गया था. क्योंकि वह समाजवादी पार्टी के नेता है. जबकि उस समय प्रदेश में बसपा की सरकार थी.
PCS अधिकारी पर चली थीं ताबड़तोड़ गोलियां
मुजफ्फरनगर में तैनात रहे पूर्व समाज कल्याण अधिकारी रिंकू सिंह राही द्वारा विभागीय स्तर पर चलाए जाने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति एवं अन्य छात्रवृति योजनाओं में बड़ा घोटाला उजागर किया गया था, जिसके बाद रिंकू सिंह राही पर 26 मार्च 2009 को आर्य समाज रोड पर स्थित प्लानिंग दफ्तर कॉलोनी में उनके सरकारी आवास के बाहर उस समय हमला हुआ था. जब वह बैडमिंटन खेल कर घर लौट रहे थे.
इस मामले में सिविल लाइन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, जिसमें तीन शूटरों बाबी उर्फ पंकज, अमित छोकर तथा प्रह्लाद सिंह को गिरफ्तार किया गया था. पुलिस द्धारा की गई पूछताछ में मुख्य आरोपी के रुप में सपा नेता व पूर्व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री मुकेश चौधरी और समाज कल्याण विभाग के एकाउन्टेंट अशोक कश्यप के साथ ही परमीत, ब्रजमोहन और आदेश ठाकुर के भी नाम सामने आए थे. इस मामले में सपा नेता मुकेश चौधरी पर गैंगेस्टर तथा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के अन्तर्गत भी कार्रवाई की गई थी. गैंगस्टर और रासुका में मुकेश चौधरी बरी हो गए थे और दिसंबर 2009 में विशेष न्यायाधीश राजबहादुर सिंह ने धोखाधड़ी व दलित उत्पीड़न के आरोपी मुकेश चौधरी को एक-एक लाख रुपए के दो मुचलकों पर जमानत दे दी थी. तभी से वे इस हाई-प्रोफाइल केस में जमानत पर थे. जबकि 6 आरोपी बॉबी उर्फ पंकज, अशोक कश्यप, प्रह्लाद सिंह, अमित छोकर और आदेश ठाकुर पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हुई.
4 आरोपियों को मिली सजा
इस मामले में विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट के न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार पांडे ने अपना फैसला सुनाते हुए सपा नेता मुकेश चौधरी को बरी कर दिया. मुकेश चौधरी के अधिवक्ता एडवोकेट नासिर अली और एडवोकेट राकेश कुमार कश्यप ने इस मामले में न्यायालय में कुल 22 गवाह पेश किए. एडवोकेट राकेश कुमार कश्यप ने बताया कि 2009 में रिंकू सिंह राही पर हुए जानलेवा हमले और दलित उत्पीडन मामले को लेकर आज अदालत का फैसला आ गया है. अदालत में इस मामले में रिंकू सिंह राही पर हमला करने के आरोप में शूटर बॉबी उर्फ पंकज, प्रहलाद सिंह, अमित छोकर के साथ ही समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन लिपिक अशोक कश्यप को दोषी मानते हुए सभी को 10-10 साल के कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है.
उन्होंने बताया कि अदालत में मुकेश चौधरी, परमीत, बृजमोहन और आदेश ठाकुर को बरी कर दिया है. इसके साथ ही पुलिस द्धारा लगाए गए आर्म्स एक्ट के मामले में अदालत में मुकेश चौधरी के साथ ही पंकज उर्फ बॉबी, प्रह्लाद सिंह और अमित छोकर को भी बरी कर दिया है. अदालत का फैसला आने के बाद सपा नेता मुकेश चौधरी ने इसे सच्चाई की जीत बताते हुए कहा कि उन्हें पूरा विश्वास था कि वह इस इस मामले में अदालत से इंसाफ हासिल करेंगे. उन्होंने अदालत के फैसले को हक का निर्णय बताते हुए खुशी जताई है.

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