खेती-किसानी

बु्रसेल्स स्प्राउट की उन्नत खेती से बढ़ाएं आमदनी

पौधों की रोपाई पहले से तैयार किए गए खेत में पौध से पौध की दूरी 45 सैंटीमीटर और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 60 सैंटीमीटर रखते हुए रोपाई करें.

किसानों के लिए सब्जी की खेती नकदी का सब से अच्छा जरीया माना जाता है. अगर सब्जियों की खेती वैज्ञानिक तरीकों से की जाए तो आमदनी और भी बढ़ जाती है. कुछ ऐसी विदेशी सब्जियां भी हैं, जिन्हें भारत की जलवायु में आसानी से उगाया जा सकता है. इन सब्जियों का बाजार रेट दूसरी भारतीय सब्जियों से अच्छा मिलता है. इस का एक कारण इन सब्जियों में शरीर की सेहत के लिए जरूरी कई तत्त्वों का मौजूद होना भी है, जो हमें बीमारियों से भी बचाती है. ऐसी ही एक सब्जी का नाम है ब्रुसेल्स स्प्राउट, जो पत्तागोभी से मिलतीजुलती है. ‘बेबी पत्तागोभी’ के नाम से भी यह जाना जाता है.

इस के एक पौधे में तनों पर पत्तागोभी की तरह ही 50 से 100 ग्राम के वजन की पत्तियों की गांठ बनती है, जिसे सब्जी के लिए इस्तेमाल किया जाता है. ब्रुसेल्स स्प्राउट को सलाद के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. ब्रुसेल्स स्प्राउट की सब्जी में सेहत के लिए खास माने जाने वाले प्रोटीन, विटामिन ए, विटामिन सी, कैल्शियम, आयरन, फास्फोरस, खनिज लवण और कार्बोहाइड्रेट्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. ब्रुसेल्स स्प्राउट को सेहत के नजरिए से अगर देखा जाए, तो खाने में इसे शामिल करने से वजन को कम किया जा सकता है.

यह टाइप 2 डायबिटीज, हृदय रोग, कैंसर, आंखों की रोशनी, पाचन और हड्डियों को मजबूत करने में भी मदद करता है. ब्रुसेल्स स्प्राउट की खेती भारत में हिमाचल प्रदेश सहित उत्तरी भारत के मैदानी व पहाड़ी इलाकों में की जाती है. अभी देश में बड़े पैमाने पर इस की खेती नहीं शुरू की जा सकी है. अगर किसान इस की खेती करते हैं, तो अपनी माली हालत को आसानी से सुधार सकते हैं. मिट्टी और खेत की तैयारी ब्रुसेल्स स्प्राउट की खेती भारत के किसी भी क्षेत्र में की जा सकती है.

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