फतेहपुर संसदीय सीट पर तीन दशक से कांग्रेस को है अच्छे दिनों का इंतजार

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  • 1989 से शुरू हुआ बुरा दौर 2014 तक नहीं थमा

  • इस बार दल-बदलू राकेश सचान पर लगाया है दांव

प्रमोद श्रीवास्तव


फतेहपुर। आजादी के बाद से हुए चुनावों में वर्ष 1962 व 1977 के आम चुनाव को छोड़कर छह बार कांग्रेस के प्रत्याशियों ने लोकसभा चुनाव में जीत का परचम फहराया है। वर्ष 1984 के बाद से अब तक पैतीस वर्षो के अन्तराल में लोकसभा के आठ चुनाव सम्पन्न हो चुके है, लेकिन किसी भी चुनाव में कांग्रेस को जीत नसीब नही हो पायी है, जबकि हर चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों को मैदान में उतार चुकी है, लेकिन हार के सिवा कुछ भी हासिल नही हुआ।

यहॉ तक कि वर्ष 1996 के चुनाव में कांग्रेस के रामप्यारे पाण्डेय की जमानत भी जब्त हो गयी थी। जिन्हें महज 7863 वोट ही प्राप्त हुए थे। बताते चले कि आजादी के बाद वर्ष 1952 व 1957 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में क्रमशः शिवदत्त उपाध्याय व अंसार हिरवानी ने जीत हासिल की थी।

वर्ष 1962 के चुनाव में पहली बार जनपद के मतदाताओ ने कांग्रेस उम्मीदवार एवं केन्द्रीय मंत्री वीबी केसकर को हराकर निर्दलीय अधिवक्ता गौरीशंकर कक्कड़ को जीत का सेहरा बांधा था।अब तक के चुनावों में दोबारा कभी-भी निर्दलीय उम्मीदवार लोकसभा का चुनाव नही जीत पाया। 1967 व 1971 के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार संत बक्स सिंह ने जीत का झंडा गाड़ा था।

इस दौरान देश में इमरजेन्सी लागू हो गयी और 1977 के चुनाव में देशभर के कई दलों ने एकजुट होकर जनता पार्टी का गठन कर लिया था। जनता पार्टी की लहर में जिले की सीट पर पार्टी उम्मीदवार बशीर अहमद एडवोकेट ने कांग्रेस के संत बक्स सिंह को रिकार्ड मतो से चुनाव हराया था। उनकी जीत का अन्तर 169489 था।

जबकि कांग्रेस को सिर्फ 57319 वोट मिले थे। इस चुनाव के बाद जनता पार्टी के टिकट पर चुने गये सांसद बशीर अहमद का निधन हो गया और जिले में पहली बार लोकसभा का उपचुनाव सम्पन्न कराया गया। इस उपचुनाव में जनता पार्टी के सै. लियाकत हुसैन ने 130621 मत हासिल कर कांग्रेस के पंडित प्रेमदत्त तिवारी को 75066 मतो के अन्तर से हरा दिया था।

इस उपचुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इन्दिरा गांधी ने लगभग 03 दिन जिले में रहकर कई सभाओ को सम्बोधित भी किया था, लेकिन पार्टी उम्मीदवार जीत नही सका था। केन्द्र की जनता पार्टी सरकार आपसी मनमुटाव के चलते कार्यकाल भी पूरा नही कर पायी थी और देश को एक नया चुनाव झेलना पड़ा था।

वर्ष 1980 के चुनाव में कांग्रेस के हरीकृष्ण शास्त्री ने लोकदल के सै. लियाकत हुसैन को 43145 मतों के अन्तर से हरा दिया था। तब कांग्रेस को 127850 तथा निर्वतमान सांसद लियाकत हुसैन को 84705 मत मिले थे। इस चुनाव के बाद 1984 में प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की हत्या के बाद लोकसभा के आम चुनाव सम्पन्न कराये गये जिसमें हरीकृष्ण शास्त्री लगातार दूसरी बार 92883 मतो के अन्तर से चुनाव जीत गये। उन्होने लोकदल के ही सै. लियाकत हुसैन को चुनाव हराया था।

इस बीच राजीव गांधी मंत्रिमण्डल में वित्त मंत्री रहे राजा माण्डा विश्वनाथ प्रताप सिंह ने पार्टी से बगावत करते हुए बोफोर्स तोप में दलाली का मुद्दा लेकर वर्ष 1989 के चुनाव में कांग्रेस को देश की सत्ता से बाहर ही नही कर दिया था, बल्कि जिले से लोकसभा का चुनाव जीतकर देश के प्रधानमंत्री भी बन गये थे।

उन्होने अपनी निकटतम प्रतिद्वंदी हरीकृष्ण शास्त्री को 121573 मतों के भारी अन्तर से शिकस्त दी थी। वर्ष 1991 के चुनाव में वीपी सिंह पुनः यहॉ से चुनाव लड़े और अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के डा. विजय सचान को 136609 मतो के अन्तर से हराया था।

इस चुनाव में कांग्रेस के हरीकृष्ण शास्त्री 26163 मत पाकर चौथे स्थान पर रहे और उनकी जमानत जब्त हो गयी थी। चुनाव जीतने के बाद वीपी सिंह ने अपना कार्यकाल भी पूरा नही किया था और लोकसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था।

वर्ष 1996 के चुनाव में भी कांग्रेस को हार का मुॅह देखना पड़ा। कांग्रेस प्रत्याशी रामप्यारे पाण्डेय को 7863 मत मिले थे। इस सीट से पहली बार बहुजन समाज पार्टी के विशम्भर प्रसाद निषाद ने भारतीय जनता पार्टी के महेन्द्र प्रताप नारायण सिंह को 23466 मतो के अन्तर से जीतकर बसपा का खाता खोला था।

इस चुनाव में भी कांग्रेस की जमानत जब्त हो गयी थी। वर्ष 1998 के चुनाव में भाजपा ने पहली बार डा. अशोक पटेल को चुनाव मैदान में उतारा और उन्हें जीत हासिल हुई। डा. अशोक पटेल 46436 मतो के अन्तर से जीत दर्ज करके भाजपा का खाता जिले की लोकसभा में खोला था।

एक वर्ष के अन्तराल में ही वर्ष 1999 के चुनाव में भाजपा ने अपने निर्वतमान सांसद डा. अशोक पटेल पर दांव लगाया और उन्होने दूसरी बार अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के सूर्यबली निषाद को मामूली 1063 मतो के अन्तर से हरा दिया था। इस चुनाव में भी कांग्रेस चौथे नम्बर पर थी।

वर्ष 2004 के चुनाव में बसपा ने महेन्द्र निषाद को मैदान में उतारा और उन्होने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के अचल सिंह को 52576 वोटों के अन्तर से हरा दिया था। इस चुनाव में तीसरी बार हैट्रिक लगाने की जुगत में चुनाव लड़ने वाले भाजपा के डा. अशोक पटेल तीसरे व कांग्र्रेस के खान गुफरान जाहिदी चौथे पायदान पर ठिठक गये थे।

वर्ष 2009 के चुनाव में समाजवादी पार्टी का जिले से लोकसभा में पहली बार खाता खुला। सपा उम्मीदवार राकेश सचान ने बसपा के महेन्द्र निषाद को 52341 मतो के अन्तर से हराया था। इस चुनाव में भाजपा के राधेश्याम गुप्त तीसरे व कांग्रेस के विभाकर शास्त्री चौथे स्थान पर रहे। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस प्रत्याशी ऊषा मौर्या की जमानत जब्त हो गयी थी। उन्हें 46550 मत मिले थे।

इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार साध्वी निरंजन ज्योति ने रिकार्ड 485360 मत हासिल किये। उन्होने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी तत्कालीन बसपा के कद्दावर नेता नसीमउद्दीन सिद्दीकी के पुत्र अफजल सिद्दीकी को 186836 मतो के अन्तर से हराकर भाजपा का भगवा फहराया था।

साध्वी वर्तमान मोदी सरकार में केन्द्रीय राज्यमंत्री है और आसन्न लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हे दोबारा उम्मीदवार बनाया है। इस चुनाव में सपा के राकेश सचान तीसरे नम्बर पर थे। कुल मिलाकर 1984 के बाद से अब तक लोकसभा के सम्पन्न हो चुके आठ लोकसभा चुनावों में कांग्रेस वनवास झेल रही है।

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