राज्यपाल लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए काम करें: राष्ट्रपति

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नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्यपालों से कहा कि हाशिए पर पड़े तबके के जीवन स्तर में सुधार करके और उच्च शिक्षा के मानकों को बढ़ाकर बदलाव के वाहक के तौर पर काम करें।
राष्ट्रपति भवन में शुरू हुए राज्यपालों के दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कोविंद ने कहा कि राज्यपाल राज्य सरकार के मार्गदर्शक और संघीय ढांचे की एक अहम कड़ी के रूप में अपना निरंतर योगदान देते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘राज्य की जनता राज्यपालों को आदर्शों और मूल्यों के स्रोत के रूप में देखती है।’’ उन्होंने कहा कि देश में अनुसूचित जनजातियों की लगभग दस करोड़ की आबादी रहती है।
कोविंद ने कहा कि विकास की यात्रा में अपेक्षाकृत पीछे रह गए इन लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में आप सभी उचित मार्गदर्शन दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत , विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘इन युवाओं के जीवन में नैतिक मूल्यों की स्थापना करने तथा उन्हें उचित शिक्षा के लिए प्रेरित करने में आप सही अर्थों में उनके अभिभावक हैं। आप उन्हें ऐसा चरित्र विकसित करने की प्रेरणा दे सकते हैं जिसके बल पर वे भारतीय मूल्यों के प्रति निरंतर संवेदनशील बने रहें। ’
देश में उच्च शिक्षा के परिदृश्य के बारे में बात करते हुए कोविंद ने कहा कि हमारे देश के 69 फीसदी विश्वविद्यालय राज्य सरकारों के नियंत्रण में चल रहे हैं, जिनमें 94 प्रतिशत विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इनमें से अधिकांश विश्वविद्यालयों के आप कुलाधिपति हैं।
अपने पद, अधिकार और अनुभव का उपयोग करते हुए शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए मार्ग – दर्शन और प्रेरणा प्रदान करते हैं।’’ राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘आप सभी यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि राज्यों के विश्वविद्यालयों में समय पर तथा पारदर्शी तरीके से विद्यार्थियों के दाखिले तथा अध्यापकों की नियुक्तियां हों।
साथ ही परीक्षाएं, परिणामों की घोषणा तथा दीक्षांत समारोह नियत समय पर हों।’’ उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते हुए वैश्विक परिप्रेक्ष्य में, शिक्षा की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए, समय-समय पर, पाठ्यक्रमों में बदलाव और सुधार करते रहना भी आवश्यक है।

कोविंद ने कहा, ‘‘राज्य के राज्यपालों के तौर पर आप युवाओं के साथ संवाद स्थापित करके, आप सभी उन्हें समाज और देश के हित में अपनी शिक्षा का सदुपयोग करने की प्रेरणा दे सकते हैं। देश की भावी पीढ़ियों का निर्माण करने के लिए हम सबको मिलकर निरंतर प्रयास करते रहना है।

राष्ट्रपति ने महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती मनाने के लिए राज्यपालों से सुझाव भी मांगे। उन्होंने कहा, ‘‘सार्थक सामाजिक बदलाव के लिए काम करना ही उनकी स्मृति को संजोए रखने का सबसे अच्छा तरीका है।’’ केंद्र सरकार ने दो अक्तूबर 2018 से 24 महीनों तक महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती मनाने का निर्णय लिया है।

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