भारत-चीन सीमा पर तनाव: भारतीय सेना के ये हैं 20 जवान जो गलवान घाटी में देश के लिए हुए शहीद

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पूर्वी लद्दाख में सोमवार रात गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में भारतीय सेना के एक कर्नल सहित 20 सैनिक शहीद हो गए। पिछले पांच दशक से भी ज्यादा समय में सबसे बड़े सैन्य टकराव के कारण क्षेत्र में सीमा पर पहले से जारी गतिरोध और भड़क गया है। सेना ने शुरुआती जानकारी देते बताया था कि एक अधिकारी और दो सैनिक शहीद हुए हैं। लेकिन बाद में पता चला कि हिंसक झड़प में एक अधिकारी समेत 20 जवान शहीद हो गए हैं।

शहीद हुए जवानों में 16 बिहार रेजिमेंट के 12 जवान, 3 पंजाब रेजिमेंट के 3 जवान, 3 मीडियम रेजिमेंट के 2 जवान, 12 बिहार रेजिमेंट, 81 माउंट बिग्रेड सिग्नल कम्पनी और 81 फील्ड रेजिमेंट के 1-1-1 शामिल हैं। गलवान वैली में शहीद हुए सभी 20 जवानों के नाम सामने आ चुके हैं।

16 बिहार रेजिमेंट के शहीद हुए जवानों के नाम:-

कर्नल संतोष बाबू – हैदराबाद (तेलंगाना)
सिपाही कुंदन कुमार- सहरसा (बिहार)
सिपाही अमन कुमार – समस्तीपुर (बिहार)
सिपाही चंदन कुमार – भोजपुर (बिहार)
हवलदार सुनील कुमार- पटना (बिहार)
सिपाही कुंदनकांत ओझा – साहिबगंज (झारखंड)
सिपाही गणेश कुंजाम – सिंहभूम (पश्चिम बंगाल)
सिपाही राजेश ओरंग – बीरभूम (पश्चिम बंगाल)
सिपाही सीके प्रधान – कंधमाल (ओडिशा)
नायब सूबेदार नंदूराम – मयूरभंज (ओडिशा)
दीपक सिंह गहरवार – रीवा (मध्यप्रदेश)
सिपाही गणेश राम – कांकेर (छत्तीसगढ़)

3 पंजाब रेजिमेंट के शहीद जवान:-

सिपाही अंकुश – हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश)
सिपाही गुरतेज सिंह – मनसा (पंजाब)
सिपाही गुरविंदर सिंह – संगरूर (पंजाब)

3 मीडियम रेजिमेंट के शहीद जवान:-

नायब सूबेदार मनदीप सिंह – पटियाला (पंजाब)
नायब सूबेदार सतनाम सिंह – गुरदासपुर (पंजाब)

इनके अलावा 12 बिहार रेजिमेंट के सिपाही जयकिशोर सिंह (वैशाली, बिहार), 81 माउंट बिग्रेड सिग्नल कम्पनी के हवलदार बिपुल रॉय (मेरठ, यूपी) और 81 फील्ड रेजिमेंट के हवलदार के पालानी (मदुरै, तमिलनाडु) शहीद हो गए।

सेना ने क्या कुछ कहा

सेना की ओर से जारी एक बयान में बताया गया कि 17 अन्य जवान जो अत्यधिक ऊंचाई पर शून्य से नीचे तापमान में गतिरोध के स्थान पर ड्यूटी के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे, उन्होंने दम तोड़ दिया है जिसके बाद शहीद हुए जवानों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है।

बयान में कहा गया कि भारतीय और चीनी जवानों के बीच गलवान क्षेत्र में जिस स्थान पर 15-16 जून 2020 को झड़प हुई वहां से दोनों सेनाओं के जवान हट गए हैं। बयान में आगे कहा गया कि भारतीय सेना राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है।

कर्नल की मां को है उन पर गर्व

झड़प में शहीद हुए कर्नल संतोष बाबू की मां को उन पर गर्व है, जिसने मातृभूमि के लिए बलिदान दिया। इसके साथ ही उन्हें यह दुख भी सता रहा है कि उनका एकलौता बेटा उन्हें छोड़कर चला गया। कर्नल की शहादत की खबर मिलते ही तेलंगाना के सूर्यपेट शहर में मातम पसर गया। कर्नल डेढ़ साल से सीमा पर तैनात थे। उन्होंने अपने पीछे अपनी पत्नी संतोषी और दो बच्चों को छोड़ गए हैं।

पिता अगली छुट्टी में कराने वाले थे सिपाही राजेश ओरंग की शादी

गलवान घाटी में चीनी सेना से लोहा लेते हुए शहीद हुए राजेश ओरंग तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े थे और 2015 में सेना में शामिल हुए थे। उनके शोक संतप्त पिता सुभाष ने बताया कि मेरे बेटे ने देश की सेवा की और उसके लिए अपनी जान दे दी। राजेश की मां आस लगाए हुए थी कि अगली छुट्टियों में जब बेटा घर आएगा तो उसकी शादी कराएंगे।

राजेश की दो छोटी बहनें हैं। वह 2015 में सेना में भर्ती हुआ था और बिहार रेजीमेंट से था। पिता सुभाष ने बताया कि बेटे की उम्र 20 साल के आसपास थी। उनकी छोटी बहन शकुंतला ने कहा, ‘‘बचपन से ही मेरा भाई देश की सेवा करना चाहता था और वह सेना में शामिल होकर खुश था। वह कुछ महीनों पहले छुट्टी पर घर आया था और उसकी शादी की बातचीत चल रही थी।’’

किसान के बेटे थे सिपाही कुंदन कुमार

बिहार के सहरसा का सिपाही कुंदन कुमार भी शहीद हुए जवानों में शामिल हैं। पिता पेशे से किसान हैं और शहीद सिपाही शादीशुदा थे। सेना द्वारा कुंदन की पत्नी बेबी देवी को फोन इस घटना की सूचना मिली। बता दें कि सिपाही कुंदन के दो बेटे हैं। जिनका नाम रोशन और राणा है।

आदिवासी समुदाय के थे सिपाही गणेश राम कुंजाम

शहीद जवानों में छत्तीसगढ़ के कांकेर के आदिवासी समुदाय से आने वाले गणेश राम कुंजाम भी शामित हैं। शहादत से करीब एक महीने पहले ही राम कुंजाम की नियुक्ति भारत-चीन सीमा पर हुई थी। वैसे तो राम कुंजाम साल 2011 में ही सेना में शामिल हो गए थे और दूसरे परिवारों की तरह की सिपाही के परिवार को फोन करके इस घटना की सूचना दी गई। फिलहाल गांववाले दुखी तो हैं ही साथ ही गर्व भी महसूस कर रहे हैं।

झारखंड का लाल है सिपाही कुंदनकांत ओझा

शुरुआती जानकारी में जिन दो जवानों की शहादत की जानकारी मिली थी उनमें से एक हैं झारखंड के साहिबगंज इलाके के कुंदनकांत ओझा। वो बिहार रेजिमेंट में थे। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने दुख जताते हुए ट्वीट किया कि चीनी सैनिकों के साथ लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में एक कर्नल और दो जवानों के शहीद होने की घटना दुःखद है। इसमें झारखंड का भी एक लाल शहीद हुआ है। शहीद जवान का नाम कुंदनकांत ओझा बताया जा रहा है जो साहिबगंज जिला के डिहारी गांव के रहने वाले थे।

8 महीने पहले हुई थी दीपक सिंह गहरवार की शादी

हिंसक झड़प में मध्य प्रदेश के रीवा का जवान दीपक सिंह गहरवार भी शहीद हो गया। बिहार रेजिमेंट ने इसकी जानकारी फोन के जरिए उनके परिजनों को दी। दीपक 21 साल के थे और 8 महीने पहले ही उनकी शादी हुई थी। वो अपने पीछे अपनी पत्नी और मां-बाप को छोड़ गए हैं। दीपक की शहादत पर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दुख जताते हुए ट्वीट किया और श्रद्धांजलि अर्पित की।

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