एक अर्से से चल रहा है वाहन काटने का धंधा

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मोहम्मदी-खीरी। मोहम्मदी में वैध अवैध वाहनो को काटकर उनका अस्तित्व खत्म करने का कारोबार 12-13 वर्ष पूर्व छोटे स्तर पर शुरू हुआ था। जो आज काफी बड़े स्तर पर हो रहा है। यहां पर हर प्रकार के वाहनो का शमशान घाट है।
शुरूआती दौर में पहले वैध जो कबाड़ हो चुके वाहनो को ही काटा जाता था बाद में नम्बर दो के वाहनो को भी काटने का सिलसिला शुरू हुआ तो उसने रूकने का नाम नहीं लिया और मोहल्ला बबौरी से दक्षिणी सरैया तक छोटे-बड़े वाहनो की कब्रगाह में न जाने कितने वाहनो का अस्तित्व खत्म कर दिया गया।
बबौरी में हाईवे के पूरब और सरैया में मण्डी रोड पर सड़क के पश्चिम इन वाहनो की कब्रगाह की भूमि अगर बोल पाती तो वो गवाह बनती कि यहां कितने ट्रक, बस, ट्रैक्टर सहित छोटे वाहन काटे गये।
इस धन्धे का माफिया जो अपने को सपा नेता भी कहलाता है वाहनो को काटने के साथ-साथ वाहनो की आरसी आदि बेचने का भी धन्धा करता है तथा काटे गये वाहनो के इंजनो को नया लुक देकर जनरेटर सेट तैयार कराकर बेचने का भी बड़ा धन्धा चल रहा है।
जनरेटरो को वाहनो के इंजन से तैयार कराया जाता है ऐसा बताया गया है अगर पुलिस ट्रको के इंजनो से बने जनरेटरो की जांच कर ले और इन इंजनो की आरटीओ से जारी एनओसी मांग ले तो एक और बड़ा खुलासा हो सकता है।
मोहम्मदी पुराने एवं चोरी के वाहनो को काटे जाने का एक बड़ा केन्द्र पिछले कई वर्षो से बना हुआ था। सपा शासन काल में एक बड़े नेता का संरक्षण पाकर चल रहे इस काले धन्धे पर पुलिस ने ‘‘महीने के चक्कर में ध्यान नहीं दिया।
बताते चले कि डग्गामार मैजिको, काले पशुओ की मोहम्मदी होकर गुजरने वाले वाहनो से वसूली सहित आबकारी आदि से आने वाली मासिफ राशि की ही भाति मोहम्मदी के कबाड़ियो से भी एक बंधी हुई रकम जाती है।
यदा-कदा कोई चोरी का माल बरामद हो जाने पर मामले को सुलझाने के एवज में अलग से मोटी रकम लिये जाने की परम्परा सी रही है। कुछ वर्ष पूर्व तक साधारण सा आदमी आज करोड़पति बन गया। कैसे ये न पुलिस-प्रशासन को दिखाई दे रहा और न आयकर विभाग की नज़र इधर जा पा रही है।
इसी कबाड़ी के कारोबारी के वाहनो के बबौरी से सरैया तक बने कब्रगाह में हजारो चैपहिया वाहनो का अस्तित्व खत्म कर दिया गया। बड़े वाहन जैसे ट्रक, बस एवं ट्रैक्टर को काटने के दौरान उनके इंजनो को उतार लिया जाता। अगर कोई जरूरतमंद इंजन ले गया तो ठीक अन्यथा उसका जनरेटर तैयार करा दिया गया जिसको बेहरीन रंग-रोगन कर ऊंचे दामो पर बेंच दिया जाता है।
बडे वाहन हो या छोटा वाहन उसको काटने से पूर्व कई प्रक्रियाए पूरी करनी होती है तभी उसे काटा जा सकता है। जैसे उस पर कोई राशि या देय बकाया न हो चाहे वो देय फाईनेन्सर का हो अथवा रोड टैक्स आदि की राशि हो। अगर वाहन पर सरकारी या प्राईवेट फाईनेन्सर की राशि बकाया है तो वो वाहन कट नहीं सकता।
जब वाहन स्वामी आरटीओ आफिस में सभी देयो की एनओसी जमा करेगे जब ही वाहन को काटने की अनुमति मिलेगी और बिना एनओसी के कोई भी वाहन कट नहीं सकता।
अगर उक्त माफिया के द्वारा बनाए गये जनरेटरो पर लगे इंजनो की एनओसी मांग ली जाये तो एक और बडा खुलासा हो सकता है। लेकिन पुलिस ऐसा करेगी नहीं। पकड़े गये ट्रको में पुलिस ने इस माफिया को साइड हीरो बनाकर अपनी मंशा साफ कर दी और सम्भवता लीपा-पोती का काम भी शुरू हो गया है।

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