युवराज सिंह ने इंटरनैशनल क्रिकेट से संन्यास लिया

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नई दिल्ली। टीम इंडिया के चैंपियन ऑलराउंडर युवराज सिंह ने आज क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी। युवराज सिंह भारत की दो वर्ल्ड चैंपियन (2007 में वर्ल्ड टी20 और 2011 में वर्ल्ड कप) टीमों का हिस्सा रहे और दोनों ही टूर्नमेंट्स में उन्होंने अपने प्रदर्शन से खास छाप छोड़ी थी। 2017 के बाद से ही उनका चयन भारतीय टीम में नहीं हो पा रहा था। बताया जा रहा है कि 37 वर्षीय युवराज आईसीसी से मान्यता प्राप्त विदेशी टी20 लीग में बतौर फ्रीलांस क्रिकेटर करियर बनाना चाहते हैं।
उन्हें जीटी20 (कनाडा), आयरलैंड और हॉलैंड में यूरो टी20 स्लैम में खेलने के ऑफर मिल रहे हैं। युवराज ने कहा कि काफी समय से लग रहा था कि अब आगे बढ़ने का वक्त आ गया है। यह स्टालिश लेफ्ट हैंडर बल्लेबाज आखिरी बार भारत के लिए फरवरी 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ टी20 इंटरनैशनल मैच में खेले थे। इससे पहले वह चैंपियंस ट्रोफी 2017 और उसके बाद वेस्ट इंडीज दौरे पर गई भारतीय टीम का हिस्सा रहे थे। उन्होंने अपने करियर का आखिरी वनडे मैच 30 जनवरी 2017 को वेस्ट इंडीज के खिलाफ एंटीगुआ में खेला था।
अपनी इस रिटायरमेंट का ऐलान युवराज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। इस मौके पर उन्होंने बताया, ‘बचपन से मैंने अपने पिता का देश के लिए खेलने का सपना पूरा करने की कोशिश की।’ उन्होंने यहां अपने क्रिकेट करियर को याद करते हुए कहा, ‘अपने 25 साल के करियर और खास तौर पर 17 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे। अब मैंने आगे बढ़ने का फैसला ले लिया है। इस खेल ने मुझे सिखाया कि कैसे लड़ना है, गिरना है, फिर उठना है और आगे बढ़ जाना है।’
युवी ने यहां एक क्रिकेटर के तौर पर कामयाब होने का श्रेय अपने पिता को दिया। उन्होंने कहा, ‘मैंने जिंदगी में कभी हार नहीं मानी। मैंने अपने पिता का सपना पूरा किया।’ रिटायर होने के बाद युवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई सवालों के जवाब दिए। उन्होंने बताया कि आईपीएल के दौरान वह सचिन से रिटायरमेंट पर बात कर रहे थे। युवी बोले, ‘सचिन ने मुझसे कहा था कि तुम्हें तय करना है कि कब अपना करियर खत्म करना है, तुमसे बेहतर कोई भी यह फैसला नहीं ले सकता।’
युवराज से पूछा गया कि उन्हें किस बात का मलाल रहेगा। इसपर वह बोले कि उन्हें ज्यादा टेस्ट मैच न खेलने का मलाल रहेगा। अगले सवाल में उनसे पूछा गया कि किस खिलाड़ी में वह अपनी छवि देखते हैं। इसपर वह बोले कि ऋषभ पंत अच्छे खिलाड़ी हैं और उनमें उन्हें अपनी छवि दिखती है। टीम इंडिया की वर्ल्ड कप 2011 जीत में वह सबसे बड़े हीरो साबित हुए थे और इस टूर्नमेंट में उन्होंने गेंद और बल्ले दोनों से खुद को बार-बार साबित किया था।
उस विश्व कप में उनके शानदार खेल के लिए उन्हें मैन ऑफ द टूर्नमेंट चुना गया था। इस वर्ल्ड कप में उन्होंने 362 रन और 15 विकेट अपने नाम किए थे। 2007 वर्ल्ड टी20 में इंग्लैंड के खिलाफ स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ही ओवर में लगातार 6 छक्के और इस मैच में सिर्फ 12 बॉल पर बनाए अर्धशतक का वर्ल्ड रेकॉर्ड आज भी उनके नाम है। इस चैंपियन खिलाड़ी ने अपने इंटरनैशनल करियर में 40 टेस्ट, 304 वनडे और 58 टी20I मैच खेले। 304 वनडे में से युवराज ने भारत के लिए 301, जबकि बाकी 3 वनडे एशिया XI के लिए खेले।
40 टेस्ट की 62 पारियों में युवी के नाम कुल 1900 रन हैं, जिसमें 3 शतक और 11 हाफ सेंचुरी उनके नाम हैं। वहीं उनके वनडे करियर की बात करें तो युवराज ने 278 पारियों में कुल 8701 रन अपने नाम किए। इस दौरान उनके बल्ले से 14 शतक और 52 अर्धशतक निकले। 58 टी20I में 1177 रन बनाने वाले युवराज ने नाम यहां 8 हाफ सेंचुरी दर्ज हैं। उन्होंने टेस्ट में कुल 9, वनडे में 111 और टी20I में 28 विकेट अपने नाम किए हैं। वर्ल्ड कप 2011 के बाद युवराज की सेहत से जुड़ी जो खबर सामने आई थी, उसने उनके फैन्स और भारतीय टीम को झकझोर दिया था।
युवराज सिंह के फेफड़े में कैंसर ट्यूमर डिटेक्ट हुआ था और उन्हें इसके इलाज के लिए लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रहना पड़ा था। युवराज इस ट्यूमर की पीड़ा के साथ ही वर्ल्ड कप में खेले थे और उन्होंने तब यह बात किसी को जाहिर नहीं की थी। तब वह भारत के लिए हर मैच में खुद को लगातार साबित कर रहे थे। युवराज इस साल आईपीएल में मुंबई इंडियंस (MI) की ओर से खेले थे लेकिन उन्हें अधिक मौके नहीं मिले और संभवत: यही कारण है कि वह अपनी भविष्य की योजनाओं पर गंभीरता से विचार करने के बाद यह निर्णय लिया।

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