यूपी बीजेपी के अध्यक्ष की अब किसे मिलेगी जिम्मेदारी

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लखनऊ।उत्तर प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पाण्डेय के केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद अब सबकी निगाहें नये प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और 11 विधानसभा सीटों के उपचुनाव पर टिकी हैं। प्रदेश में भाजपा ने 80 लोकसभा सीटों में से 62 पर विजय हासिल की।
पाण्डेय की अगुवाई में पार्टी ने एकजुट विपक्ष विशेषकर सपा बसपा गठबंधन का मजबूती से मुकाबला किया और उनकी हर रणनीति को विफल किया। भाजपा की सहयोगी पार्टी अपना दल एस ने दो सीटें जीतीं। कांग्रेस के हिस्से सिर्फ रायबरेली की ही सीट आई।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष कौन होगा, इसे लेकर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है लेकिन कुछ वरिष्ठ पार्टी नेताओं ने संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, विधान परिषद सदस्य विद्यासागर सोनकर, लक्ष्मण आचार्य और सांसद महेश शर्मा में से किसी को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

कई नामों की हो रही है चर्चा


डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय ने वर्ष 2014 में बीजेपी के टिकट पर चंदौली से चुनाव लड़ा और मोदी लहर में लोकसभा पहुंच गए। इस बार दोबारा चुने गए और कैबिनेट मंत्री का पद मिला।
इसी के बाद से उनके उत्तराधिकारी की तलाश जारी है। फिलहाल, प्रदेश में बीजेपी का नया अध्यक्ष कौन होगा यह अभी कहना मुश्किल है, लेकिन सियासी गलियारों में कई नामों की लेकर चर्चाओं का बजार गर्म है।

डॉ. महेश शर्मा के नाम का भी जिक्र


बीजेपी सूत्रों की मानें तो अभी कई नेताओं के नाम आगे चल रहे हैं। इनमें से किसकी प्रदेश अध्यक्ष के रूप में ताजपोशी की जाएगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि भारतीय जनता पार्टी को ऐसा नेता अध्यक्ष बनाने की फिराक में है, जो सवर्ण और पिछड़ा के साथ दलित वोट बैंक को सहेजकर रखे, लेकिन ज्यादातर चांस सवर्ण नेता के ही बन रहे हैं।
उन्होंने बताया कि गौतमबुद्धनगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा का नाम भी इस समय चर्चा में है। उनके पास सरकार का पांच साल का अनुभव है। वह संगठन के भी व्यक्ति माने जाते हैं। इसी तरह उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को भी संगठन में लाकर एक प्रयोग किया जा सकता है। महामंत्री विजय बहादुर पाठक भी अध्यक्ष पद के लिए संगठन की दृष्टि से उपयुक्त माने जा रहे हैं।

फेहरिस्त में स्वतंत्र देव सिंह भी हैं शामिल


इसी प्रकार अगर बीजेपी पिछड़े चेहरों में दांव लगाने की सोचेगी तो सबसे पहला नाम स्वतंत्र देव सिंह का है। वह योगी सरकार में परिवहन मंत्री और मध्य प्रदेश के प्रभारी भी हैं। चुनाव के समय बीजेपी उनसे रैली और संगठन के कार्यकर्ताओं की भीड़ एकत्रित करने कार्य लेती रही है।
इसके बाद अभी आगरा से सांसद एसपी सिंह बघेल, मंत्री दारा सिंह चौहान का नाम भी चर्चा में है। इसी प्रकार बीजेपी अगर दलित समुदाय से बनाने की सोचेगी तो प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र के एमएलसी लक्ष्मण आचार्य, प्रफेसर रामशंकर कठेरिया, विद्यासागर सोनकर जैसे नाम भी चर्चा में हैं।

2022 की तैयारी में बीजेपी


उत्तर प्रदेश में विधानसभा का चुनाव करीब तीन साल बाद है लेकिन तैनाती चुनावी पृष्ठभूमि के आधार पर ही होनी तय मानी जा रही है। कुछ जानकार बताते हैं कि बीजेपी अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी में अभी से जुट जाना चाहती है। पार्टी की मंशा यह भी है कि वह प्रदेश में गठबंधन के तिलिस्म को भी जड़ से उखाड़ फेंके।
ऐसे में वह दलितों के साथ-साथ पिछड़ों को भी पूरी तरह से अपने पाले में करने के लिए जोर लगाएगी। इस बार अध्यक्ष वर्ष 2022 में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर ही बनाया जाएगा। ऐसे में यह जिम्मेदारी ऐसे किसी व्यक्ति को दी जा सकती है, जिसके नाम पर किसी प्रकार का विवाद नहीं हो और ना ही पार्टी में किसी प्रकार की गुटबंदी की शुरुआत हो।

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